आसनसोल। ट्रेन के नित्ययात्रियों के लिए सफर केवल गंतव्य तक पहुंचने का जरिया नहीं होता, बल्कि यह उनकी दिनचर्या, भावनाओं और रिश्तों का अहम हिस्सा बन जाता है। रोज़ साथ चलने वाले सहयात्री धीरे धीरे परिवार का रूप ले लेते हैं और ट्रेन एक चलता फिरता घर बन जाती है। इसी आत्मीयता और अपनत्व का अनोखा नजारा शनिवार को आसनसोल रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला।शनिवार सुबह ठीक 7 बजकर 35 मिनट पर जब आसनसोल जसीडीह मेमू पैसेंजर ट्रेन प्लेटफॉर्म संख्या 4 से अपने गंतव्य के लिए प्रस्थान करने को तैयार खड़ी थी, तभी नित्ययात्रियों के बीच उत्सव का माहौल बन गया। मिहिजाम में पैथोलॉजी लैब संचालित करने वाली शिप्रा दास कोले ने अपना जन्मदिन ट्रेन में ही अपने नित्य सहयात्रियों के साथ केक काटकर मनाया। ट्रेन के डिब्बे में तालियों की गूंज, मुस्कान और शुभकामनाओं ने पूरे माहौल को खास बना दिया।शिप्रा दास कोले पिछले 25 वर्षों से आजीविका के लिए इसी ट्रेन से रोज़ाना सफर कर रही हैं। इतने लंबे समय में ट्रेन और सहयात्री उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह ट्रेन मेरे लिए सिर्फ सफर का साधन नहीं, बल्कि मेरा दूसरा घर है और आप सभी मेरा परिवार। उनकी इस भावना ने वहां मौजूद हर यात्री को भावुक कर दिया।सहयात्रियों ने भी पूरे उत्साह के साथ उन्हें जन्मदिन की बधाइयां दीं और उनके दीर्घायु व सुखद जीवन की कामना की। किसी ने मिठाइयां बांटी तो किसी ने यादों की तस्वीरें अपने मोबाइल में कैद कीं। कुछ देर के लिए ट्रेन मानो रिश्तों की पटरी पर दौड़ती दिखाई दी।यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि भागदौड़ भरी जिंदगी में भी इंसानियत, अपनापन और खुशियों के पल कहीं न कहीं खुद रास्ता बना ही लेते हैं और कभी कभी वह रास्ता रेल की पटरियों से होकर गुजरता है।
चलती ट्रेन में रिश्तों की मिठास: नित्ययात्रियों के संग शिप्रा दास कोले ने मनाया जन्मदिन
