इको टूरिज्म से बदलेगा झारखंड का भविष्य: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने विकास के लिए दिया बड़ा विजन

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी रांची। झारखंड को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड इको टूरिज्म अथॉरिटी की शासी निकाय की चौथी बैठक झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में आयोजित हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य में इको टूरिज्म की असीम संभावनाओं को लेकर गहन विचार विमर्श किया गया और इसके विकास के लिए व्यापक रणनीति तय करने पर जोर दिया गया।बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के उन सभी क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाए, जहां प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है और पर्यटन की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, पहाड़ियों, झरनों और जलाशयों के कारण देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल होने की क्षमता रखता है। ऐसे में इन संसाधनों का संरक्षण करते हुए सुनियोजित तरीके से इको टूरिज्म को बढ़ावा देना आवश्यक है।मुख्यमंत्री ने वन, पर्यटन एवं जल संसाधन विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जब तक विभाग आपस में तालमेल बनाकर कार्य नहीं करेंगे, तब तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं होगा। इसलिए तीनों विभागों को मिलकर एक समग्र और व्यवहारिक कार्य योजना तैयार करनी होगी, ताकि इको टूरिज्म परियोजनाओं को जमीन पर उतारा जा सके।बैठक में यह भी तय किया गया कि इको टूरिज्म के विकास के लिए केवल स्थानों की पहचान ही नहीं, बल्कि वहां आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण भी समयबद्ध तरीके से किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्पष्ट निर्देश दिया कि चिन्हित स्थलों पर सड़क, पेयजल, स्वच्छता, आवासीय सुविधाएं और पर्यटकों के लिए अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समयसीमा के भीतर सभी योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।बैठक के दौरान राज्य के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों में मैथन, नेतरहाट, पतरातू, चाईबासा, दुमका और रांची पर विस्तार से चर्चा की गई। इन स्थानों को इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर अधिकारियों ने प्रस्तुति दी। खास तौर पर मसानजोर की तर्ज पर पतरातू में इको टूरिज्म को विकसित करने की योजना पर गंभीरता से विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्थलों को इस तरह विकसित किया जाए कि पर्यावरण संतुलन बना रहे और स्थानीय संस्कृति को भी बढ़ावा मिले।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इको टूरिज्म केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का एक मजबूत माध्यम भी बन सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्थानीय युवाओं को इन परियोजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल सकें। इससे न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य के धार्मिक स्थलों, वन क्षेत्रों, नदियों, झीलों और पहाड़ी इलाकों को चिन्हित कर वहां पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाए। साथ ही, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इको टूरिज्म का मूल उद्देश्य प्रकृति के संरक्षण के साथ विकास करना है, इसलिए सभी योजनाओं में पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सुझाव भी प्रस्तुत किए। इसमें स्थानीय हस्तशिल्प, संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि पर्यटकों को झारखंड की वास्तविक पहचान से परिचित कराया जा सके। इसके अलावा डिजिटल प्रचार प्रसार और बेहतर कनेक्टिविटी पर भी चर्चा हुई, जिससे अधिक से अधिक पर्यटक राज्य की ओर आकर्षित हो सकें।इस महत्वपूर्ण बैठक में पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार, पर्यटन विभाग के सचिव मुकेश कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार, वन्यप्राणी एवं मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक एस आर नटेश सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही इकोटूरिज्म सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव साझा किए।कुल मिलाकर, इस बैठक में लिए गए निर्णय झारखंड को इको टूरिज्म के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं। यदि इन योजनाओं का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में झारखंड देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रमुख इको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में उभर सकता है।

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