जामताड़ा में इफ्तार बना एकता का उत्सव: जीतूडंगाल से गूंजा भाईचारे और सौहार्द का संदेश

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी जामताड़ा। रमज़ान के पवित्र महीने में जहां एक ओर इबादत और संयम का माहौल होता है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे की मिसाल भी देखने को मिलती है। ऐसा ही एक दिल को छू लेने वाला नज़ारा जामताड़ा जिले के जीतूडंगाल में आयोजित एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला, जहां धर्म की सीमाएं टूटती नजर आईं और इंसानियत सबसे ऊपर दिखाई दी।कांग्रेस नगर अध्यक्ष अमरनाथ मिश्रा द्वारा आयोजित इस इफ्तार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रोजेदारों के साथ साथ विभिन्न समुदायों के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि हिंदू समाज के लोग भी बढ़ चढ़कर शामिल हुए। सभी ने एक साथ बैठकर रोजा खोला और एक दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम का परिचय दिया।इस आयोजन ने गंगा जमुनी तहजीब की उस परंपरा को जीवंत कर दिया, जो सदियों से भारतीय समाज की पहचान रही है। कार्यक्रम में शामिल लोगों के चेहरों पर जो सुकून और अपनापन झलक रहा था, वह इस बात का प्रमाण था कि सामाजिक सौहार्द आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।इफ्तार के इस मौके पर साहिल उर्फ शान शेख ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब वे और अमरनाथ मिश्रा एक साथ मस्जिद में बैठे, तो वह पल उनके लिए बेहद खास और भावुक कर देने वाला था। उन्होंने कहा उस समय ऐसा महसूस हो रहा था जैसे हम सब एक ही परिवार का हिस्सा हैं। यह समझ पाना मुश्किल था कि कौन किस धर्म से है। यही असली एकता और भाईचारा है, जो हमें एक दूसरे से जोड़ता है।उन्होंने आगे कहा कि ऐसे आयोजन समाज में फैल रही नकारात्मक सोच को खत्म करने का काम करते हैं और लोगों के बीच विश्वास को मजबूत बनाते हैं। उनका मानना है कि अगर इसी तरह के कार्यक्रम लगातार होते रहें, तो समाज में किसी भी तरह की दूरी या भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।वहीं कार्यक्रम में मौजूद गुलाब अंसारी ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जामताड़ा की पहचान ही यहां की आपसी एकता और प्रेम है। उन्होंने कहा हमारे यहां हमेशा से हिंदू और मुस्लिम समुदाय एक साथ मिलकर रहते आए हैं। हम एक दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं और खुशियां बांटते हैं। यही हमारी असली ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में जब समाज को बांटने की कोशिशें की जा रही हैं, ऐसे आयोजन एक सकारात्मक संदेश देते हैं और लोगों को जोड़ने का काम करते हैं। इफ्तार जैसे मौके पर जब सभी लोग एक साथ बैठकर खाना खाते हैं, तो दिलों की दूरियां अपने आप खत्म हो जाती हैं।कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में एक अलग ही माहौल देखने को मिला। लोग एक दूसरे से गले मिलते नजर आए, मुस्कुराहटें बांटी गईं और हर तरफ प्रेम और सौहार्द का वातावरण था। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस आयोजन का हिस्सा बनकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था।स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की जमकर तारीफ की। उनका कहना था कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने का काम करते हैं और आपसी रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। कई लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि इस तरह के आयोजन सिर्फ रमज़ान तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि साल भर विभिन्न मौकों पर आयोजित किए जाने चाहिए ताकि समाज में एकता और भाईचारे की भावना बनी रहे।इफ्तार कार्यक्रम में गुलाब अंसारी, शान शेख, शाहरुख शेख, इरफान शेख, आवास शेख, फिरोज शेख समेत कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया और यह संदेश दिया कि जब बात इंसानियत की हो, तो धर्म और जाति जैसी दीवारें अपने आप गिर जाती हैं।कुल मिलाकर, जीतूडंगाल का यह इफ्तार कार्यक्रम सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह एक सामाजिक संदेश था। एक ऐसा संदेश जो बताता है कि सच्ची ताकत एकता में है। जब लोग मिलकर रहते हैं, एक दूसरे का सम्मान करते हैं और साथ मिलकर खुशियां मनाते हैं, तभी एक मजबूत और खुशहाल समाज का निर्माण होता है।इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जामताड़ा की मिट्टी में भाईचारा और सद्भाव रचा बसा है। यहां के लोग न सिर्फ अपने त्योहारों को मनाते हैं, बल्कि दूसरों के त्योहारों को भी उतनी ही खुशी और सम्मान के साथ अपनाते हैं। यही वह भावना है, जो भारत को विविधता में एकता का सच्चा उदाहरण बनाती है।

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