विद्यासागर की स्मृति में सजा संस्कारों का उत्सव: प्रभात फेरी, प्रतियोगिताएं और रंगारंग प्रस्तुतियों ने बांधा समां

तहलका न्यूज 24 संवाददाता राजकुमार मंडल करमाटाड़। प्रखंड क्षेत्र के नंदनकानन परिसर, विद्यासागर में रविवार को गुरु दक्षिणा उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन हर वर्ष महान शिक्षाविद एवं समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की पुण्य स्मृति में किया जाता है। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, शिक्षा के महत्व और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही पूरे परिसर में उत्साह का माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल हुए।कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यासागर की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर किया गया। आयोजन समिति के सदस्यों एवं उपस्थित अतिथियों ने माल्यार्पण कर उनके योगदान को याद किया। इसके बाद नंदनकानन परिसर से प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। हाथों में बैनर और नारों के साथ निकली यह प्रभात फेरी भारतीय स्टेट बैंक होते हुए गणपत महतो चौक पहुंची। यहां से आगे बढ़ते हुए जुलूस स्टेशन परिसर तक गया, जहां पुनः विद्यासागर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इस दौरान पूरे रास्ते वातावरण देशभक्ति और सामाजिक जागरूकता के नारों से गूंजता रहा।प्रभात फेरी के बाद प्रतिभागी पुनः नंदनकानन परिसर लौटे, जहां विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण क्विज प्रतियोगिता रही, जिसका संचालन खुशी गुप्ता ने कुशलता के साथ किया। प्रतियोगिता में बच्चों और युवाओं ने अपनी ज्ञान क्षमता का प्रदर्शन किया और दर्शकों का भी भरपूर मनोरंजन हुआ। इस प्रतियोगिता में चित्र चक्रवर्ती ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि सत्यम गुप्ता द्वितीय स्थान पर रहे। वहीं संस्कार राज को तृतीय स्थान से संतोष करना पड़ा। विजेताओं को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।इसके अलावा आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी शानदार प्रस्तुति दी गई। छोटे-छोटे बच्चों ने नृत्य, गीत और नाट्य रूपांतरण के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया। विशेष रूप से बंगाल से आए छात्र-छात्राओं ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनकी प्रस्तुतियों में बंगाली संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान तालियों की गूंज और उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा।इस आयोजन में बिहार-बंगाल समिति, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल से आए विभिन्न बंगाली संगठनों के सदस्यों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी भव्य बना दिया। आयोजन को सफल बनाने में संचालन समिति के अध्यक्ष देवाशीष मिश्रा की अहम भूमिका रही, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की। वहीं सचिव चंदन मुखर्जी ने व्यवस्थाओं का संचालन बखूबी संभाला।विद्यासागर स्मृति रक्षा समिति के अध्यक्ष तपन कुमार सेन ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपने महान आदर्शों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उपाध्यक्ष विद्रोह कुमार मित्र ने भी विद्यासागर के योगदान को याद करते हुए उनके विचारों को अपनाने की अपील की। बिहार बंगाली समिति के उपाध्यक्ष अंजन कुसुम ने कहा कि शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में विद्यासागर का योगदान अतुलनीय है और ऐसे आयोजनों के माध्यम से उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाना चाहिए।कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा और वरिष्ठ सदस्य डीडी भंडारी ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। इसके अलावा सी गांधी, चंचल राय, कंचन घोष, मोहन वर्मा, रंजीत कुमार चौधरी, भट्टाचार्य और रतन सेन सहित कई गणमान्य लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।समापन के अवसर पर आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। पूरे कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से किया गया, जिससे यह आयोजन सफल और यादगार बन गया। गुरु दक्षिणा उत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर अपने महान व्यक्तित्वों को याद करता है, तो वह न केवल अतीत से प्रेरणा लेता है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत दिशा तय करता है।

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