तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी चित्तरंजन। पवित्र सप्ताह के अंतर्गत गुड फ्राइडे की पूर्व संध्या पर चित्तरंजन के एक नंबर गेट स्थित संत जोशेफ रोमन कैथोलिक चर्च में पुण्य गुरुवार के अवसर पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस खास मौके पर ईसाई समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में चर्च पहुंचकर विशेष प्रार्थना सभा में भाग लिया और प्रभु यीशु मसीह के त्याग, प्रेम और बलिदान को याद किया।पूरे चर्च परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण बना हुआ था। श्रद्धालु शांत मन से प्रार्थना में लीन होकर न केवल धार्मिक परंपराओं का पालन कर रहे थे, बल्कि मानवता, भाईचारे और करुणा के मूल्यों को भी आत्मसात कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत पादरी द्वारा बाइबल के पवित्र वचनों के पाठ से हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक चिंतन की ओर प्रेरित किया।इस अवसर पर पुण्य गुरुवार की एक महत्वपूर्ण परंपरा का भी निर्वहन किया गया। जैसा कि ईसाई मान्यताओं के अनुसार प्रभु यीशु मसीह ने अपने बारह शिष्यों के पैर धोकर सेवा, विनम्रता और प्रेम का संदेश दिया था, उसी परंपरा को जीवंत करते हुए पादरी द्वारा श्रद्धालुओं के पैर धोने की रस्म निभाई गई। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों के मन को भावुक कर दिया और सभी ने इसे सेवा और समर्पण का प्रतीक माना।प्रार्थना सभा के दौरान चर्च के फादर लीनस टोप्पो ने अपने प्रवचन में यीशु मसीह के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यीशु का जीवन केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक मार्गदर्शक है। उन्होंने प्रेम, क्षमा और त्याग के मूल्यों को जीवन में अपनाने की अपील की और कहा कि आज के समय में जब समाज में विभाजन और तनाव बढ़ रहा है, तब यीशु के संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने मोमबत्तियां जलाकर विश्व शांति, समृद्धि और आपसी सौहार्द की कामना की। चर्च में गूंजते भजन-कीर्तन और बाइबल पाठ ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। हर कोई इस आध्यात्मिक माहौल में डूबा हुआ नजर आया, जहां संगीत, प्रार्थना और सामूहिक आस्था ने एक अनोखा समागम प्रस्तुत किया।विशेष बात यह रही कि इस आयोजन में हर आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी देखने को मिली। युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी समान रूप से उत्साह और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। युवाओं ने जहां आयोजन की व्यवस्था संभाली, वहीं महिलाओं ने भजन-कीर्तन में सक्रिय भूमिका निभाई। बुजुर्गों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया।चर्च परिसर में सुरक्षा और अनुशासन का भी विशेष ध्यान रखा गया। पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने अनुशासन का पालन करते हुए प्रार्थना सभा में भाग लिया और एक दूसरे के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखा।पुण्य गुरुवार का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम भी बना। उपस्थित लोगों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में प्रेम, करुणा और सद्भाव को बनाए रखेंगे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करेंगे।कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई, जिसमें सभी ने हाथ जोड़कर मानवता के कल्याण की कामना की। यह पल अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक था, जब पूरे चर्च में एक साथ प्रार्थना की गूंज सुनाई दे रही थी।इस प्रकार चित्तरंजन के संत जोशेफ रोमन कैथोलिक चर्च में आयोजित यह विशेष प्रार्थना सभा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि इसने समाज को एकजुटता, प्रेम और सेवा का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। पुण्य गुरुवार के इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि चाहे समय कितना भी बदल जाए, लेकिन मानवता और करुणा के मूल्य हमेशा प्रासंगिक रहेंगे।
पुण्य गुरुवार पर श्रद्धा का सागर: चित्तरंजन चर्च में गूंजा प्रेम, त्याग और मानवता का संदेश
