क्रूस के मार्ग पर आस्था की यात्रा: चित्तरंजन में गुड फ्राइडे पर निकला श्रद्धा और समर्पण का जुलूस

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी चित्तरंजन। चित्तरंजन के एक नंबर गेट स्थित संत जोशेफ रोमन कैथोलिक चर्च में शुक्रवार दोपहर गुड फ्राइडे के अवसर पर गहरी आस्था, त्याग और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। तपती धूप के बावजूद प्रभु यीशु मसीह के सैकड़ों अनुयायियों ने कंधों पर क्रूस उठाकर एक श्रद्धामयी जुलूस निकाला, जिसने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक भावनाओं से सराबोर कर दिया।यह जुलूस स्थानीय शिशु विहार स्कूल के समीप से प्रारंभ होकर चर्च परिसर तक पहुंचा। जुलूस में शामिल श्रद्धालु प्रभु यीशु के उस कष्टमय मार्ग को स्मरण कर रहे थे, जिसे उन्होंने मानवता के उद्धार के लिए सहर्ष स्वीकार किया था। कंधों पर क्रूस उठाए श्रद्धालुओं के चेहरे पर तपस्या, समर्पण और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।इस जुलूस की सबसे खास बात यह रही कि मार्ग के विभिन्न स्थानों पर कुल 15 पड़ाव चिन्हित किए गए थे। इन पड़ावों को चॉक से क्रमशः 1 से 15 तक अंकित किया गया था, जहां हर स्थान पर जुलूस कुछ समय के लिए रुकता और श्रद्धालु प्रभु यीशु को स्मरण करते हुए स्तुति एवं प्रार्थना करते। यह पूरी प्रक्रिया उस ऐतिहासिक और पवित्र मार्ग का प्रतीक थी, जिसे वाया डोलोरोसा कहा जाता है।वाया डोलोरोसा, यरूशलेम का एक प्रसिद्ध पारंपरिक मार्ग है, जिसे दुखों का मार्ग भी कहा जाता है। मान्यता है कि यही वह रास्ता है, जहां से होकर प्रभु यीशु ने सिंह द्वार से लेकर कलवरी पर्वत तक अपनी अंतिम यात्रा तय की थी। चित्तरंजन में निकाले गए इस क्रूस जुलूस में उसी मार्ग का प्रतीकात्मक पुनर्निर्माण किया गया, जिससे श्रद्धालु उस ऐतिहासिक पीड़ा और त्याग को आत्मसात कर सकें।हर पड़ाव पर रुककर प्रभु की पीड़ा, उनके बलिदान और उनके द्वारा दिए गए प्रेम व क्षमा के संदेश को याद किया गया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भजन-स्तुति की और प्रभु के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। वातावरण में गूंजते प्रार्थना गीत और गंभीरता से भरे क्षण हर किसी के मन को भीतर तक छू रहे थे।जुलूस के चर्च परिसर पहुंचने के बाद विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और प्रभु यीशु मसीह के बलिदान को याद करते हुए गहन प्रार्थना की। पूरे चर्च में शांति, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण बना रहा।इस अवसर पर चर्च के फादर लीनस टोप्पो ने गुड फ्राइडे के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुड फ्राइडे केवल एक शोक का दिन नहीं, बल्कि यह मानवता के लिए प्रभु यीशु के सर्वोच्च प्रेम और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस दिन प्रभु यीशु ने क्रूस पर अपने प्राण त्यागकर समस्त मानव जाति के पापों का प्रायश्चित किया।फादर टोप्पो ने अपने संदेश में कहा कि गुड फ्राइडे हमें यह सिखाता है कि प्रेम, क्षमा और त्याग ही जीवन के सबसे बड़े मूल्य हैं। प्रभु यीशु ने अपने कष्टों के बीच भी अपने शत्रुओं को क्षमा किया, जो हमें यह प्रेरणा देता है कि हम भी अपने जीवन में द्वेष और घृणा को त्यागकर प्रेम और करुणा का मार्ग अपनाएं।उन्होंने आगे कहा कि क्रूस केवल पीड़ा का प्रतीक नहीं, बल्कि यह आशा, विश्वास और उद्धार का प्रतीक भी है। प्रभु यीशु का बलिदान हमें यह विश्वास दिलाता है कि अंधकार के बाद प्रकाश अवश्य आता है और हर कठिनाई के बाद एक नई शुरुआत संभव होती है।फादर टोप्पो ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इस पवित्र दिन के संदेश को अपने जीवन में उतारें और समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे को बढ़ावा दें। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया कि वे प्रभु के आदर्शों का पालन करें और एक बेहतर समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।प्रार्थना सभा के दौरान विभिन्न भक्ति गीतों और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु पूरे मनोयोग से इन गतिविधियों में शामिल हुए और प्रभु के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव और मानवता के कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना की। इस दौरान पूरी सभा एक स्वर में प्रार्थना करती नजर आई, जो एकता और विश्वास का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत कर रही थी।इस प्रकार चित्तरंजन में मनाया गया गुड फ्राइडे न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह आस्था, अनुशासन और आध्यात्मिक जागरूकता का भी प्रतीक बनकर उभरा। तपती धूप में भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और समर्पण ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची भक्ति किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती।यह आयोजन न केवल प्रभु यीशु के बलिदान की याद दिलाता है, बल्कि यह भी प्रेरित करता है कि हम उनके बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं और समाज में प्रेम, शांति और सद्भाव का संदेश फैलाएं।

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