तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी जामताड़ा। सड़क हादसों में घायलों की मदद करने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई गुड समेरिटन (नेक मददगार) योजना जामताड़ा जिले में अपनी असली मंशा के अनुरूप धरातल पर नहीं उतर पा रही है। योजना के तहत जहां मददगारों को सम्मानित करने की प्रक्रिया किसी हद तक जारी है, वहीं उन्हें मिलने वाली प्रोत्साहन राशि सरकारी उदासीनता के कारण अब तक अधर में लटकी हुई है। नतीजा यह है कि नेक इरादे से लोगों की जान बचाने वाले नागरिकों को आर्थिक प्रोत्साहन का लाभ नहीं मिल पा रहा है।परिवहन विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाना है। मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 134ए के तहत इस पहल को कानूनी आधार भी दिया गया है। इसके तहत मदद करने वाले व्यक्ति को न केवल सम्मानित किया जाता है, बल्कि आर्थिक इनाम देने का भी प्रावधान है। लेकिन जामताड़ा में यह व्यवस्था फिलहाल कागज़ों में ही सीमित नजर आ रही है।जिला स्तर पर अधिकारियों का कहना है कि योजना के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या फंड की कमी है। जिला परिवहन पदाधिकारी का मानना है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए आवंटन मिलने की उम्मीद है, जिससे लंबित मामलों का भुगतान किया जा सकेगा।जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक तोसीफ जलीली ने जानकारी दी कि यह योजना वर्ष 2022 में शुरू की गई थी। शुरुआत में गुड समेरिटन को प्रोत्साहन राशि देने के लिए कुछ धनराशि भी प्राप्त हुई थी, जिसे जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में वितरित कर दिया गया था। हालांकि, जानकारी के अभाव और प्रक्रिया की समझ न होने के कारण यह राशि खर्च नहीं हो सकी और मार्च 2023 के अंत में इसे वापस करना पड़ा। इसके बाद से अब तक इस मद में कोई नई राशि जारी नहीं की गई है।वर्तमान स्थिति यह है कि जिले में गुड समेरिटन योजना के तहत करीब छह से दस आवेदन लंबित पड़े हैं, जिनका भुगतान होना बाकी है। ये वे लोग हैं जिन्होंने सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों की निस्वार्थ मदद की है जिसमें किसी को अस्पताल पहुंचाया, किसी ने एंबुलेंस बुलाने में सहायता की, तो किसी ने मौके पर प्राथमिक उपचार दिया। लेकिन इनकी सराहना तो हुई, आर्थिक सहायता अब तक नहीं मिल सकी।इस योजना का एक अहम पहलू यह भी है कि मददगारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाती है। यदि कोई व्यक्ति सड़क हादसे में घायल की मदद करता है, तो उससे पुलिस या अस्पताल जबरन पूछताछ नहीं कर सकते। वह अपनी पहचान बताने के लिए बाध्य नहीं है और यदि वह गवाह नहीं बनना चाहता, तो उसे कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। इस प्रावधान का उद्देश्य लोगों को बिना किसी डर के मदद के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करना है।योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से पांच हजार रुपये और झारखंड सरकार की ओर से दो हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। इसके अलावा, हर साल राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ गुड समेरिटन को एक लाख रुपये का पुरस्कार देने की व्यवस्था भी है। बीते वर्ष जिले में सात लोगों को इस योजना के तहत सम्मानित किया गया था, लेकिन उन्हें आर्थिक लाभ मिल पाया या नहीं, यह अब भी एक सवाल बना हुआ है।इसी कड़ी में जनवरी 2026 से मार्च 2026 के बीच राहवीर योजना भी लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य भी सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वालों को प्रोत्साहित करना था। इस योजना के तहत तीन लाभार्थियों को राशि दी जानी थी, लेकिन फंड के अभाव में उन्हें भी अब तक भुगतान नहीं हो सका है।दूसरी ओर, परिवहन विभाग की हिट एंड रन मुआवजा योजना कुछ हद तक जमीन पर असर दिखा रही है। झारखंड सरकार की अधिसूचना संख्या 162, दिनांक 18 अप्रैल 2022 के अनुसार, ऐसे मामलों में जहां कोई वाहन दुर्घटना कर भाग जाता है, पीड़ित पक्ष को मुआवजा देने का प्रावधान है। इस योजना के तहत मृत्यु होने पर दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल होने पर पचास हजार रुपये की सहायता राशि निर्धारित की गई है।आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 से मार्च 2026 तक इस योजना के तहत लगभग 55 लाभार्थी चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 22 लोगों के खातों में मुआवजा राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। वहीं, 15 से 20 मामलों में कागजी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कुछ मामलों में दस्तावेजों की कमी के कारण भुगतान में देरी हुई है, लेकिन विभाग की ओर से लाभार्थियों से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज पूरे कराने का प्रयास किया जा रहा है।जामताड़ा में गुड समेरिटन योजना की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि अच्छी मंशा के बावजूद प्रशासनिक और वित्तीय बाधाएं योजनाओं की सफलता में रोड़ा बन रही हैं। जरूरत इस बात की है कि सरकार समय पर फंड उपलब्ध कराए और स्थानीय स्तर पर जागरूकता के साथ-साथ प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि जो लोग इंसानियत के नाते दूसरों की जान बचाने के लिए आगे आते हैं, उन्हें उनका हक मिल सके।जब तक सम्मान के साथ इनाम नहीं जुड़ेगा, तब तक इस योजना का प्रभाव सीमित ही रहेगा। ऐसे में यह जरूरी है कि सरकार और प्रशासन मिलकर इस पहल को मजबूती दें, ताकि समाज में मदद की भावना को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके और सड़क हादसों में जान बचाने की कोशिशें और प्रभावी हो सकें।
सम्मान मिला, लेकिन इनाम अटका: जामताड़ा में नेक मददगार योजना कागज़ों तक सीमित
