अंधकार से प्रकाश की ओर: चित्तरंजन के संत जोशेफ चर्च में भव्य ईस्टर विजिल, आधी रात तक गूंजा हल्लेलुयाह

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी चित्तरंजन। पवित्र सप्ताह के अंतर्गत पवित्र शनिवार की रात चित्तरंजन के एक नंबर गेट स्थित संत जोशेफ रोमन कैथोलिक चर्च में ईस्टर की पूर्व संध्या पर भव्य ईस्टर विजिल का आयोजन किया गया। रात साढ़े दस बजे से शुरू हुई इस विशेष प्रार्थना सभा में सैकड़ों की संख्या में ईसाई समुदाय के श्रद्धालुओं ने भाग लिया और लगभग 40 दिनों के उपवास काल के समापन के साथ प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान का उत्सव श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया।कार्यक्रम की शुरुआत अंधकार के बीच हुई, जहां चर्च परिसर में एक आध्यात्मिक और शांत वातावरण व्याप्त था। इस दौरान फादर लीनस टोप्पो ने पवित्र बाइबल का पाठ किया और उसके बाद पास्चल मोमबत्ती प्रज्वलित की। यह मोमबत्ती प्रभु यीशु मसीह के पुनर्जीवन के प्रकाश का प्रतीक मानी जाती है, जो संसार से अंधकार और मृत्यु पर विजय का संदेश देती है।पास्चल मोमबत्ती जलाने के बाद फादर लीनस टोप्पो उसे लेकर चर्च के मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश किए। उनके पीछे-पीछे सैकड़ों श्रद्धालु हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां लेकर चर्च में दाखिल हुए। यह दृश्य न केवल अत्यंत मनमोहक था, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ भी था कि अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक। पूरे चर्च परिसर में मोमबत्तियों की रोशनी फैल गई, जिससे वातावरण एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।जैसे ही सभी श्रद्धालु चर्च के भीतर एकत्र हुए, कुछ समय बाद चर्च की मुख्य लाइटें भी जलाई गईं। इसके साथ ही सामूहिक रूप से हल्लेलुयाह का उद्घोष किया गया, जो ईस्टर पर्व की विशेष पहचान है। यह उद्घोष लंबे समय तक गूंजता रहा और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।ईस्टर विजिल के दौरान कई धार्मिक अनुष्ठान और गतिविधियां संपन्न हुईं। बाइबल पाठ, प्रार्थना, भजन और अन्य धार्मिक क्रियाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं ने प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान की महिमा का गुणगान किया। यह आयोजन रात करीब दो बजे तक चला, जिसमें हर क्षण श्रद्धा, विश्वास और उत्साह से भरा हुआ था।प्रार्थना सभा के समापन के बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के बीच अंडा और ब्रेड वितरित किया गया। इस अवसर पर फादर लीनस टोप्पो ने ईस्टर में अंडे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अंडा नए जीवन, पुनर्जन्म और आशा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अंडे का कठोर छिलका उस बंद कब्र को दर्शाता है, जिसमें यीशु मसीह को रखा गया था, और जब यह छिलका टूटता है तो उसके अंदर से नया जीवन बाहर आता है। यह घटना मृत्यु पर विजय और जीवन की नई शुरुआत का संदेश देती है।फादर टोप्पो ने आगे कहा कि ईस्टर केवल एक पर्व नहीं, बल्कि मानव जीवन में आशा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अंततः सत्य और प्रकाश की ही जीत होती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रेम, भाईचारे और सेवा की भावना को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।कार्यक्रम के दौरान चर्च के अंदर का दृश्य अत्यंत मनमोहक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर था। मोमबत्तियों की रोशनी, भजनों की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे माहौल को दिव्यता से भर दिया। हर व्यक्ति इस पवित्र अवसर का हिस्सा बनकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहा था।ईस्टर विजिल का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह सामुदायिक एकता और सामाजिक सद्भाव का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण बना। सैकड़ों लोगों की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि ईस्टर का संदेश केवल एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे मानव समाज के लिए प्रेरणादायक है।अंत में श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को ईस्टर की शुभकामनाएं दीं और प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान की खुशी साझा की। इस प्रकार चित्तरंजन के संत जोशेफ रोमन कैथोलिक चर्च में आयोजित ईस्टर विजिल का यह पावन आयोजन आस्था, उल्लास और आध्यात्मिकता के साथ संपन्न हुआ, जो लोगों के दिलों में लंबे समय तक अपनी छाप छोड़ गया।

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