तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी जामताड़ा। कहते हैं कि बदलाव की शुरुआत एक छोटे से कदम से होती है, और अगर इरादे मजबूत हों तो वही कदम एक नई दिशा तय कर देता है। जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड के गोकुला गांव की रहने वाली मुसर्रत खातून ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की और आज स्ट्रॉबेरी दीदी के नाम से अपनी एक अलग पहचान बना ली है।मुसर्रत खातून की कहानी एक आम गृहणी से आत्मनिर्भर महिला बनने तक के संघर्ष और सफलता की मिसाल है। पहले वे धान और मकई जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर थीं, जिससे सीमित आय ही हो पाती थी। लेकिन उनकी जिंदगी में मोड़ तब आया जब वे झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी से जुड़ीं और गुलाब आजीविका सखी मंडल की सदस्य बनीं। यहां उन्हें आधुनिक खेती की तकनीकों और नए विकल्पों के बारे में प्रशिक्षण मिला।ट्रेनिंग के दौरान ही मुसर्रत दीदी ने स्ट्रॉबेरी की खेती के बारे में जाना। यह एक ऐसी फसल थी, जो जामताड़ा जैसे इलाके में आमतौर पर नहीं उगाई जाती। शुरुआत में यह निर्णय आसान नहीं था, क्योंकि इसमें जोखिम भी था और लोगों की शंकाएं भी। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सीमित संसाधनों के साथ अपने खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर दी।उनकी मेहनत रंग लाई। आज उनके खेतों में लाल-लाल स्ट्रॉबेरी लहलहा रही हैं, जो न सिर्फ देखने में आकर्षक हैं बल्कि बाजार में भी अच्छी कीमत दिला रही हैं। उनकी आय में पहले की तुलना में कई गुना वृद्धि हुई है। स्थानीय बाजार में स्ट्रॉबेरी की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे उन्हें आर्थिक मजबूती मिली है।मुसर्रत खातून की सफलता ने पूरे इलाके में एक नई सोच को जन्म दिया है। जहां पहले किसान केवल पारंपरिक खेती तक सीमित थे, वहीं अब वे नई और अधिक लाभकारी फसलों की ओर ध्यान देने लगे हैं। खासकर महिलाओं के लिए मुसर्रत दीदी एक प्रेरणा बन गई हैं, जो यह दिखाती हैं कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी आत्मनिर्भर बन सकता है।उनकी यह पहल केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे जामताड़ा जिले के लिए एक नई दिशा का संकेत है। स्ट्रॉबेरी जैसी हाई-वैल्यू फसल की खेती यहां के किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बन सकती है। आने वाले समय में यदि इस दिशा में और प्रयास किए जाएं, तो जामताड़ा भी स्ट्रॉबेरी उत्पादन के लिए अपनी एक अलग पहचान बना सकता है।मुसर्रत खातून ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच नई हो और हौसले बुलंद, तो मिट्टी भी सोना उगलने लगती है। उनकी यह कहानी न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि बदलाव की शुरुआत खुद से करनी होती है।
स्ट्रॉबेरी दीदी की प्रेरक उड़ान: जामताड़ा की मुसर्रत खातून ने बदली खेती की तस्वीर
