गुरु पूर्णिमा पर आस्था का कारवां: मिहिजाम-चित्तरंजन से सिख संगत का भव्य जत्था चंद्रकोना गुरुद्वारा साहेब के लिए रवाना

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी मिहिजाम। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मिहिजाम, चित्तरंजन और रूपनारायणपुर क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब सिख समुदाय के सैकड़ों श्रद्धालुओं का एक विशाल जत्था चंद्रकोना गुरुद्वारा साहेब के दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए रवाना हुआ। बुधवार की सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई इस आध्यात्मिक यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में सराबोर कर दिया।इस विशेष यात्रा में महिला, पुरुष, युवक और युवतियां बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में, हाथों में ध्वज निशान लिए, गुरु वाणी का गुणगान करते हुए आगे बढ़ रहे थे। चित्तरंजन के गेट नंबर एक से निकला यह जत्था सड़क मार्ग से गेट नंबर तीन होते हुए रूपनारायणपुर पहुंचा, जहां स्थानीय सिख संगत ने उनका स्वागत किया और उनके साथ यात्रा में शामिल होकर इसे और भव्य बना दिया।यात्रा की शुरुआत से पहले मिहिजाम स्थित गुरुद्वारा परिसर में विशेष अरदास का आयोजन किया गया। इस दौरान संगत ने गुरु महाराज के चरणों में मत्था टेककर सुख-शांति और समाज की भलाई की कामना की। अरदास के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके बाद कीर्तन और भजन के बीच श्रद्धालु उत्साह और श्रद्धा के साथ अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए।इस आयोजन को लेकर गुरुद्वारा कमिटी के पदाधिकारियों ने बताया कि यह यात्रा हर वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित की जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। कमिटी के अध्यक्ष जगजीत सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष तजिंदर सिंह बल और सचिव गुरमीत सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि चंद्रकोना स्थित गुरुद्वारा साहेब सिख समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है। यह स्थान सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरु नानक देव से जुड़ा हुआ है, जहां उनके चरण पड़े थे। इस ऐतिहासिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं में यहां जाने की विशेष आस्था रहती है।उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं का यह जत्था बस के माध्यम से चित्तरंजन और रूपनारायणपुर होते हुए चंद्रकोना पहुंचेगा और वहां आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेगा। यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई है। जत्था 2 अप्रैल को पुनः अपने गृह क्षेत्र लौटेगा।इस धार्मिक यात्रा को सफल बनाने में मिहिजाम के सिख व्यवसायी फतेह चंद खत्री उर्फ पिंटू खत्री का विशेष योगदान रहा। उनके सहयोग से ही इस पूरे आयोजन की व्यवस्था संभव हो सकी। गुरुद्वारा कमिटी और संगत की ओर से उन्हें अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया और उनके सेवा भाव की सराहना की गई।श्रद्धालुओं ने बताया कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और गुरु के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं आज भी मानवता को सही मार्ग दिखाती हैं। उनके उपदेशों में सत्य, सेवा और समानता हर व्यक्ति के जीवन को प्रेरित करते हैं। इसी भावना के साथ श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर जाकर अपनी आस्था अर्पित करते हैं।यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में भक्ति गीतों और कीर्तन की गूंज सुनाई देती रही। स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धालुओं का स्वागत किया और उनकी यात्रा को सफल बनाने के लिए शुभकामनाएं दीं। गुरुद्वारा प्रबंधन के अनुसार, इस प्रकार की धार्मिक यात्राएं समाज में एकता, भाईचारे और सेवा भाव को बढ़ावा देती हैं। यह केवल आस्था का प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है। खासकर युवाओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी भी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जागरूक और प्रतिबद्ध है।गौरतलब है कि चंद्रकोना गुरुद्वारा साहेब सिख धर्म का एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं और गुरु के संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।इस प्रकार गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर निकला यह जत्था न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में एकता, सेवा और भाईचारे का भी संदेश दे गया। पूरे क्षेत्र में इस आयोजन को लेकर उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना रहा, जो आने वाले दिनों में भी लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

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