तहलका न्यूज 24 संवाददाता कुंडहित (जागरण)। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह जीवन के हर पहलू को समृद्ध करने का माध्यम है। इसी सोच को साकार करते हुए पीएमश्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय सुद्राक्षीपुर में दो दिवसीय सांस्कृतिक अनुष्ठान एवं विविध कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न सिर्फ बच्चों की प्रतिभा को मंच दिया, बल्कि उनके भीतर छिपी रचनात्मकता और सांस्कृतिक समझ को भी नई दिशा प्रदान की।विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का माहौल उत्साह, उमंग और रंगारंग प्रस्तुतियों से सराबोर रहा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना था, ताकि वे शिक्षा के साथ साथ सांस्कृतिक, सामाजिक और रचनात्मक गतिविधियों में भी आगे बढ़ सकें।कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनमें नृत्य, नाट्यकला, गीत संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियां शामिल थीं। छोटे छोटे बच्चों ने अपनी मासूम अदाओं और प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। मंच पर प्रस्तुत हर कार्यक्रम ने यह साबित किया कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच और मार्गदर्शन की जरूरत होती है।इस दो दिवसीय आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें सांस्कृतिक विनिमय की झलक भी देखने को मिली। बच्चों ने विभिन्न राज्यों की संस्कृति, परंपराओं, वेशभूषा और भाषा को प्रस्तुत कर विविधता में एकता का संदेश दिया। इस पहल से बच्चों को देश के अलग अलग हिस्सों की जीवनशैली को समझने और अपनाने का अवसर मिला, जो उनके ज्ञान और दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में सहायक साबित हुआ।मौके पर शिक्षक जगन्नाथ वाउरी ने कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान प्रदान कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि विद्यालय में समय समय पर ऐसे आयोजन किए जाते हैं, ताकि छात्र छात्राएं अपनी प्रतिभा को पहचान सकें और उसे निखार सकें।उन्होंने कहा इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चे एक दूसरे के विचारों, परंपराओं, कला, भाषा और मूल्यों को साझा करते हैं। इससे उनमें आपसी समझ और सहयोग की भावना विकसित होती है, जो उनके भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।कार्यक्रम में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक कक्षाओं तक के छात्र छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। पुराने और नए परिसर के बच्चों ने सामूहिक रूप से भागीदारी करते हुए अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। नाट्य प्रस्तुतियों में सामाजिक संदेश भी देखने को मिला, जहां बच्चों ने शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कुरीतियों जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।नृत्य प्रस्तुतियों में पारंपरिक और आधुनिक शैली का सुंदर समन्वय देखने को मिला। बच्चों ने लोकनृत्य से लेकर देशभक्ति गीतों पर शानदार प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों की खूब वाहवाही लूटी। रंग बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।विद्यालय के अन्य शिक्षकों में समीर मंडल, अनूप मंडल, सुब्रता घोष, मानस मंडल और जयंत कुमार सिंह ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। सभी शिक्षकों ने इस आयोजन को बच्चों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष चंदन मंडल ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों के अंदर आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि जब बच्चों को मंच मिलता है, तो वे अपनी झिझक छोड़कर खुलकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, जिससे उनका मानसिक और भावनात्मक विकास होता है।कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को विद्यालय की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी और उन्होंने भविष्य में और बेहतर करने का संकल्प लिया।इस मौके पर बड़ी संख्या में अभिभावक भी उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों की प्रस्तुति का आनंद लिया और विद्यालय के इस प्रयास की सराहना की। अभिभावकों का कहना था कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को उजागर करने का बेहतरीन माध्यम हैं।समापन अवसर पर विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव बना, बल्कि पूरे क्षेत्र में शिक्षा और संस्कृति के महत्व को भी रेखांकित करने में सफल रहा।कुल मिलाकर, पीएमश्री उत्क्रमित उच्च विद्यालय सुद्राक्षीपुर का यह दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों के लिए सीख, मनोरंजन और प्रेरणा का अद्भुत संगम साबित हुआ, जिसने यह संदेश दिया कि शिक्षा के साथ साथ संस्कृति और रचनात्मकता का विकास भी उतना ही जरूरी है।
रंग, रस और संस्कृति का संगम: सुद्राक्षीपुर विद्यालय में बच्चों ने बिखेरी प्रतिभा की चमक
