कर्माटांड़ के गांवों में उमड़ी आस्था की लहर: तीन दिवसीय सुरझाओ पूजा परंपरा और उत्सव के बीच सम्पन्न

कर्माटांड़। प्रखंड क्षेत्र के हेट कर्माटांड़, दुधानी, ताराबहाल समेत आसपास के कई गांवों में तीन दिनों तक चली सुरझाओ पूजा का समापन रविवार को गहरी आस्था, सामूहिकता और पारंपरिक उल्लास के साथ हुआ। सूर्य भगवान की उपासना पर आधारित यह अनुष्ठान ग्रामीण जीवन की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

पूजा की शुरुआत पहले दिन “नहाए-खाय” की पवित्र रस्म से हुई। सूर्योदय से पूर्व श्रद्धालुओं ने स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण किया, जिसे तीन दिवसीय अनुष्ठान की आध्यात्मिक शुरुआत माना जाता है। दूसरे दिन क्षेत्र के गांवों में धार्मिक रंग और भी गहरा हो गया। भक्तों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और शाम को खरना समारोह बड़े अनुशासन और भक्ति भाव से संपन्न हुआ। घरों और पूजा स्थलों पर तैयार की गई खीर को महाप्रसाद के रूप में सभी ने सामूहिक रूप से ग्रहण किया। इस दौरान महिलाओं और युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।

तीसरे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा अपने चरम पर पहुँची। परंपरा के अनुसार सादा बकरे की बलि देकर सूर्य देव की आराधना का अंतिम विधान पूरा किया गया। सुबह से ही पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गांवों में मांदर-ढोल की थाप, भक्ति संगीत और पारंपरिक गीतों ने माहौल को उत्सवपूर्ण बना दिया।

इसी क्रम में हेट कर्माटांड़ निवासी अनिल मंडल के आवास पर भी सुरझाओ पूजा का भव्य आयोजन किया गया, जहाँ दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रही। पूजा स्थल पर आनंद, रौनक और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण बना रहा।

लगातार तीन दिनों तक चले इस पारंपरिक पर्व ने न केवल धार्मिक उत्साह को चरम पर पहुँचाया, बल्कि ग्रामीणों में आपसी एकजुटता और सांस्कृतिक गर्व की भावना को भी मजबूत किया। सुरझाओ पूजा के सफल समापन के बाद पूरे क्षेत्र में उल्लास और संतोष का माहौल व्याप्त है।

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