आदिवासी परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम: बड़जोरा के शिव थान में श्रद्धा के साथ मनाया गया शिव विवाह

मिहिजाम। बड़जोरा पंचायत के बूढ़ीपाड़ा स्थित शिव थान में इस वर्ष भी पारंपरिक उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ शिव विवाह समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गांव के महिला-पुरुषों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत किया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, लोक संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता का विशेष माहौल देखने को मिला।शिव थान के पुजारी गुरु हड़ाम रेणु मुर्मू ने जानकारी देते हुए बताया कि यहां पिछले दो दशकों से लगातार शिव विवाह का आयोजन किया जा रहा है। उनके अनुसार, एक धार्मिक स्वप्न के माध्यम से उन्हें भगवान शिव ने पूजा आरंभ करने का संदेश दिया था, जिसके बाद इस स्थल की स्थापना कर नियमित पूजा-अर्चना शुरू हुई। धीरे-धीरे यह आयोजन क्षेत्र की पहचान बन गया और हर वर्ष ग्रामीण उत्साहपूर्वक इसमें भाग लेते हैं।कार्यक्रम के दौरान आदिवासी परंपरा की झलक साफ दिखाई दी। विवाह मंडप में महुआ पेड़ की डालियों और पारंपरिक अस्त्रों को सजाया गया, जो स्थानीय संस्कृति और पहचान का प्रतीक हैं। गांव के लोग ढाक की गूंजती धुनों के बीच सामूहिक रूप से तालाब से कलश में जल भरकर लाए और उसे धार्मिक अनुष्ठान में प्रयोग किया गया। लोक गीतों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच शिव विवाह संपन्न होने के बाद ग्रामीणों में खास उल्लास देखा गया। आयोजन स्थल पर देर तक धार्मिक गीत और पारंपरिक संगीत गूंजता रहा। सोमवार को श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद वितरण का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि आदिवासी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता की मिसाल भी प्रस्तुत करता नजर आया।

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