तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी चित्तरंजन। रेलनगरी चित्तरंजन में सीएलडब्ल्यू कर्मी एवं पूर्व हॉकी खिलाड़ी एरिक लकड़ा की मौत के बाद जनाक्रोश खुलकर सामने आ गया है। मंगलवार शाम करीब छह बजे आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने चित्तरंजन के तीन नंबर गेट को अचानक जाम कर दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। यह विरोध प्रदर्शन सोमवार रात दुर्गापुर के एक निजी अस्पताल में 22 दिनों तक जिंदगी से जूझने के बाद एरिक लकड़ा के निधन के विरोध में किया गया।मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही उनका शव दुर्गापुर से चित्तरंजन लाया गया, परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। परिजनों ने पुलिस की कथित लापरवाही और हमलावरों की अब तक गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर तीखी नाराजगी जताई। गेट जाम के बाद प्रदर्शनकारियों ने चित्तरंजन के फतेहपुर स्थित थाने का रुख किया, जहां उन्होंने शव को थाना गेट पर रखकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और न्याय की मांग की। करीब एक घंटे तक चले इस घेराव ने पूरे इलाके का माहौल तनावपूर्ण बना दिया।घटना की पृष्ठभूमि 8 मार्च की शाम से जुड़ी है। उस दिन करीब 6 बजे एरिक लकड़ा मिहिजाम से अपने क्वार्टर लौट रहे थे। इसी दौरान शिशु विहार विद्यालय के पास बाइक सवार तीन अज्ञात हमलावरों ने उनका पीछा किया और उनकी कार को रोक लिया। सोशल मीडिया पर वायरल घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, हमलावरों ने उन्हें वाहन से बाहर खींचकर बेरहमी से लात-घूंसे से पीटा। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि वे मौके पर ही बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़े।घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि हमलावर ही उन्हें उनकी कार में डालकर कस्तूरबा गांधी अस्पताल पहुंचाकर फरार हो गए। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर देखते हुए उन्हें दुर्गापुर रेफर कर दिया गया, जहां वे 22 दिनों तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करते रहे और अंततः दम तोड़ दिया।इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें घटनास्थल और अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गईं, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। बावजूद इसके, पुलिस अब तक हमलावरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने में विफल रही है, जिससे लोगों में भारी रोष व्याप्त है।मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के इतने दिन बाद भी पुलिस की निष्क्रियता समझ से परे है। यही कारण है कि क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चिरेका के विभिन्न संगठन भी इस मुद्दे पर एकजुट हो गए हैं और लगातार दोषियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।एससी-एसटी एसोसिएशन, लेबर यूनियन और अन्य संगठनों ने इस घटना को गंभीर बताते हुए पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इंटक के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने भी पुलिस की सुस्त कार्यशैली की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह जनाक्रोश बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे क्षेत्र की विधि-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।मंगलवार को चले विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय नियंत्रित हुई जब थाना प्रभारी शेख इस्माइल अली ने परिजनों को जल्द से जल्द हमलावरों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों ने शव को थाना गेट से हटाया और प्रदर्शन समाप्त किया।इसके पश्चात शव को मृतक के चित्तरंजन स्थित सुंदर पहाड़ी इलाके के स्ट्रीट नंबर 66, क्वार्टर संख्या 51ए में लाया गया। यहां संत जोशेफ रोमन कैथोलिक चर्च के फादर लीनस टोप्पो द्वारा प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें ईसाई समुदाय सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।बाद में एरिक लकड़ा के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव झारखंड के सिमडेगा जिले के बारबेरा के लिए रवाना किया गया, जहां बुधवार को ईसाई रीति-रिवाज के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।एरिक लकड़ा अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। उनकी असामयिक मृत्यु से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे चित्तरंजन क्षेत्र में शोक की लहर है। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।अब देखना यह होगा कि पुलिस अपने आश्वासन पर कितनी जल्दी अमल करती है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं। फिलहाल, क्षेत्र में गम और गुस्से का माहौल बना हुआ है, और लोगों की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
एरिक लकड़ा की मौत के बाद सड़क से थाना तक प्रदर्शन, पुलिस पर उठे सवाल
