गेट बंदी पर उबाल: मिहिजाम की आवाज़ को दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं

चित्तरंजन। चित्तरंजन आरपीएफ टाउन पोस्ट के इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार द्वारा गेट नंबर 2 को पुनः बंद किए जाने के फैसले ने इलाके में तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दे दिया है। इस निर्णय को तुगलकी फरमान करार देते हुए मिहिजाम नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष बालमुकुन्द रविदास ने मौके पर पहुँचकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।बालमुकुन्द रविदास ने कहा कि चित्तरंजन प्रशासन मिहिजाम की जनता को भेड़-बकरी समझने की भूल कर रहा है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जब जैसा मन हुआ, आदेश थोप दिया जाता है, बिना यह सोचे कि आम लोगों की दिनचर्या, चिकित्सा जरूरतों और ड्यूटी पर आने जाने में कितनी कठिनाई होगी। यह रवैया न केवल असंवेदनशील है, बल्कि जनहित के भी खिलाफ है।उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सुरक्षा ही चिंता का विषय है, तो समाधान गेट बंद करना नहीं, बल्कि प्रवेश पर सख्त जांच व्यवस्था लागू करना है। आरपीएफ जवानों को निर्देश दिया जाए कि जांच के बाद ही आवागमन होने दिया जाए, न कि पूरे मिहिजाम को संदेह के कटघरे में खड़ा कर दिया जाए।बालमुकुन्द रविदास ने मिहिजाम की ऐतिहासिक और सामाजिक गरिमा को रेखांकित करते हुए कहा कि इस धरती पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे महान विभूतियों के चरण पड़े हैं। विश्वविख्यात लेक्सिन के आविष्कारक डॉ. परिमल बनर्जी जैसे विद्वान यहीं के निवासी रहे हैं। आज भी यहां से आईएएस, आईपीएस, इसरो वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और अनेक वरिष्ठ अधिकारी निकल चुके हैं।उन्होंने चित्तरंजन प्रशासन से सोच बदलने और सकारात्मक व्यवहार अपनाने की अपील करते हुए कहा कि मिहिजामवासी चित्तरंजन की सुरक्षा को लेकर उतने ही सजग हैं, क्योंकि दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा है।

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