जामताड़ा में विश्व जल दिवस पर जागरूकता का महासंगम: पानी बचाएं भविष्य बचाएं का गूंजा संदेश

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी जामताड़ा। जामताड़ा के जिला पंचायत रिसोर्स सेंटर में सोमवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर जल महोत्सव पखवाड़ा के तहत एक भव्य जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जल संरक्षण और संचयन को लेकर व्यापक जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रवि आनंद, जिला पंचायत राज पदाधिकारी पंकज कुमार रवि, जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कलानाथ एवं पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता अनूप कुमार महतो द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, मुखिया, जलसहिया और स्थानीय लोग शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान जल संरक्षण को लेकर जागरूकता का माहौल देखने को मिला।अपने संबोधन में उपायुक्त रवि आनंद ने जल के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जल जीवन का आधार है और इसके बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और बदलती जीवनशैली के कारण जल का उपयोग कई गुना बढ़ गया है जिससे जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने चिंता जताई कि आज लोग अनजाने में पानी की बर्बादी कर रहे हैं जिसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है।उपायुक्त ने लोगों से अपील की कि वे अपनी दिनचर्या में बदलाव लाकर जल संरक्षण की दिशा में छोटे छोटे कदम उठाएं। उन्होंने बताया कि हमारी प्राचीन सभ्यताओं में जल संचयन की समृद्ध परंपरा रही है जिसका उदाहरण सिंधु घाटी सभ्यता में देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी उस परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है और आधुनिक तकनीकों के साथ उसे जोड़कर जल संकट का समाधान तलाशना होगा।कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली जलसहियाओं और मुखियाओं को सम्मानित किया गया। उन्हें प्रमाण पत्र, शॉल और मोमेंटो देकर उनके योगदान की सराहना की गई। यह सम्मान उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना जो अपने स्तर पर जल संरक्षण के लिए प्रयासरत हैं।कार्यपालक अभियंता अनूप कुमार महतो ने अपने संबोधन में कहा कि जलसहिया ग्रामीण क्षेत्रों में जल योजनाओं को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने बताया कि 8 मार्च से 22 मार्च तक चलाए गए जल महोत्सव पखवाड़ा के दौरान विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है।कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी जल संरक्षण का संदेश दिया गया। स्वागत गीत और नुक्कड़ नाटक ने उपस्थित लोगों को न केवल मनोरंजन किया बल्कि उन्हें जल के महत्व के प्रति जागरूक भी किया। इसके अलावा एफटीके के माध्यम से जल की गुणवत्ता की जांच का लाइव प्रदर्शन भी किया गया जिससे लोगों को पानी की शुद्धता जांचने की जानकारी मिली।कुछ जलसहियाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपने अपने गांवों में लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया और जल योजनाओं को सफल बनाने में योगदान दिया। उनके अनुभवों ने अन्य लोगों को भी प्रेरित किया।कार्यक्रम के अंत में उपायुक्त ने सभी उपस्थित लोगों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। सभी ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे जल की बर्बादी नहीं करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।इस मौके पर जिला एवं प्रखंड स्तर के कई अधिकारी, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, जिला समन्वयक, प्रखंड समन्वयक, मुखिया और बड़ी संख्या में जलसहिया उपस्थित रहीं।कुल मिलाकर यह कार्यक्रम न केवल एक औपचारिक आयोजन था बल्कि यह जनजागरूकता का एक प्रभावी मंच साबित हुआ। जल संरक्षण के प्रति लोगों की सोच में बदलाव लाने और सामूहिक भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल रही। इस आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि यदि हम आज पानी की कीमत नहीं समझेंगे तो भविष्य में हमें गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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