आयुष्मान योजना में बड़ा खेल: जामताड़ा में फर्जी इलाज का खुलासा, एक अस्पताल सील, दूसरे पर एफआईआर

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी जामताड़ा। झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा आयुष्मान भारत योजना के तहत जामताड़ा जिले में सामने आया है। यह मामला खास इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह जिला राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का गृह क्षेत्र है। प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जिला प्रशासन ने बुधवार को व्यापक जांच अभियान चलाते हुए कई निजी स्वास्थ्य संस्थानों की पड़ताल की। इस दौरान जामताड़ा के सिटी हॉस्पिटल में भारी अनियमितताएं सामने आईं जिसके बाद तत्काल प्रभाव से उसे सील कर दिया गया। वहीं एक अन्य संस्थान मंगलम नेत्रालय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।इस पूरे अभियान का नेतृत्व उपायुक्त रवि आनंद ने किया। उनके साथ स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम मौजूद थी जिसने औचक निरीक्षण के दौरान अस्पतालों के संचालन की हकीकत सामने ला दी।सिटी हॉस्पिटल में खुली लापरवाही की पोलप्रशासनिक टीम ने जब सिटी हॉस्पिटल का निरीक्षण किया तो वहां की स्थिति चौंकाने वाली थी। अस्पताल में एक भी योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। मरीजों की जांच एक ऑप्टोमेट्रिस्ट द्वारा किए जाने की बात सामने आई जो नियमों का खुला उल्लंघन है।निरीक्षण के दौरान ऑपरेशन थियेटर, सीसीटीवी फुटेज, मरीजों का रजिस्टर, इलाज से संबंधित फाइलें और परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर की बारीकी से जांच की गई। दस्तावेजों में कई गड़बड़ियां पाई गईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अस्पताल में इलाज के नाम पर भारी अनियमितताएं चल रही थीं।सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब मरीजों के रजिस्टर में दर्ज मोबाइल नंबरों की जांच की गई। कई नंबर या तो बंद मिले या फिर वे राजस्थान और केरल जैसे दूर दराज राज्यों के थे। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई कि फर्जी मरीज दिखाकर सरकारी योजना का दुरुपयोग किया जा रहा था।जांच में गड़बड़ियों की पुष्टि होते ही उपायुक्त ने मौके पर ही कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को तत्काल डिस्चार्ज करने का आदेश दिया और सिटी हॉस्पिटल को सील कर दिया गया।इसके अलावा अस्पताल के महत्वपूर्ण दस्तावेज, रजिस्टर और अन्य साक्ष्य जब्त कर लिए गए हैं ताकि आगे की जांच में उनका उपयोग किया जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस मामले में दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।सिटी हॉस्पिटल के बाद प्रशासनिक टीम मंगलम नेत्रालय पहुंची। यहां भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं थी। जांच में पाया गया कि इस संस्थान ने आयुष्मान योजना के तहत मात्र एक महीने में 600 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन करने का दावा किया है।इतनी बड़ी संख्या में ऑपरेशन को लेकर प्रशासन को गंभीर संदेह हुआ। जब दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की जांच की गई तो कई विसंगतियां सामने आईं। इससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि यहां भी फर्जी तरीके से मरीज दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।इस कार्रवाई के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। निजी अस्पतालों की भूमिका, निगरानी तंत्र की कमजोरी और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर चिंतन की जरूरत महसूस की जा रही है।आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त और बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है लेकिन इस तरह के फर्जीवाड़े से योजना की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगाई गई तो इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ेगा।उपायुक्त रवि आनंद ने स्पष्ट किया कि जिले में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में अन्य निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की भी जांच की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार न हो।इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश भी देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा में इस तरह की लापरवाही और धोखाधड़ी बेहद गंभीर है।हालांकि प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से लोगों में यह उम्मीद भी जगी है कि अब स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और दोषियों को सजा मिलेगी।फिलहाल प्रशासन द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच जारी है। जांच के आधार पर और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यदि आरोप साबित होते हैं तो संबंधित अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं और जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।यह मामला न सिर्फ जामताड़ा बल्कि पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना जरूरी है।

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