तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी मिहिजाम। रेलनगरी चित्तरंजन और मिहिजाम क्षेत्र में रविवार को पॉम संडे (खजूर रविवार) पूरे धार्मिक उत्साह, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दोनों क्षेत्रों के चर्चों से भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में ईसाई धर्मावलंबियों ने भाग लेकर प्रभु जीसस क्राइस्ट के यरूशलेम में विजयी प्रवेश की स्मृति को जीवंत किया।चित्तरंजन के एक नंबर गेट स्थित संत जोशेफ रोमन कैथोलिक चर्च में सुबह से ही विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन हुआ। श्रद्धालु खजूर की टहनियां हाथों में लेकर प्रभु के स्वागत में जुटे। इसके बाद सीबीएसई कॉन्वेंट स्कूल से शोभायात्रा की शुरुआत हुई, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कॉन्वेंट चर्च तक पहुंची। इस दौरान भजन-कीर्तन और प्रार्थनाओं की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।शोभायात्रा में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों की सहभागिता देखने लायक रही। सभी ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ यात्रा में भाग लिया। श्रद्धालु भक्ति गीत गाते हुए आगे बढ़ रहे थे, जिससे शहर में एक अलग ही आध्यात्मिक माहौल बन गया। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश भी देता नजर आया।इस अवसर पर फादर लीनस टोप्पो ने अपने प्रवचन में जीसस क्राइस्ट ट्राईमफल एंट्री ईंटों जेरूसलम के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें मानवता, सेवा, करुणा और त्याग का संदेश देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाएं और समाज में प्रेम और शांति का वातावरण बनाए रखें।वहीं, मिहिजाम के आम बागान स्थित पीएच चर्च में भी पाम संडे को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। यहां ईसाई समुदाय के लोगों ने पारंपरिक ‘खजूर यात्रा’ निकालकर प्रभु यीशु के यरूशलेम आगमन की स्मृति को दोहराया। विश्वासी हाथों में पाम की डालियां लिए भजन-कीर्तन करते हुए विभिन्न मोहल्लों से गुजरते हुए चर्च पहुंचे। पूरे मार्ग में भक्तिमय वातावरण बना रहा और लोग प्रभु की स्तुति में लीन नजर आए।पास्टर रेवरेंट अशोक लाल ने बताया कि पाम संडे ईसाई धर्म में विशेष महत्व रखता है और इसी दिन से पवित्र सप्ताह की शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि यह सप्ताह प्रभु यीशु के दुखभोग, त्याग और बलिदान को याद करने का समय होता है। श्रद्धालु इस दौरान उपवास, प्रार्थना और सेवा कार्यों के माध्यम से अपने आध्यात्मिक जीवन को सशक्त बनाते हैं।उन्होंने आगे जानकारी दी कि आने वाले दिनों में चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाएंगी। विशेष रूप से शुक्रवार को चित्तरंजन के नॉर्थ चर्च में मिहिजाम और चित्तरंजन के सभी ईसाई समुदाय के लोग एकत्रित होकर सामूहिक प्रार्थना सभा में भाग लेंगे। यह आयोजन धार्मिक एकता और सामूहिक आस्था का प्रतीक होगा।मिहिजाम की शोभायात्रा में भी भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिन्होंने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। भजन-कीर्तन के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।इस अवसर पर पास्टर रेवरेंट अशोक लाल, फिलिप हांसदा, एलियाजर हेंब्रम, रानी कुमारी प्रसाद, डेविड दास, रंजीता चौधरी, सुलेखा राय, आयुष प्रसाद, अनुभव लाल और रौशन मशीह सहित कई श्रद्धालुओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने मिलकर प्रार्थना के माध्यम से समाज में शांति, प्रेम और सौहार्द की कामना की।पाम संडे के साथ ही ईसाई धर्म का पवित्र सप्ताह, जिसे होली वीक कहा जाता है, प्रारंभ हो गया है। यह सप्ताह गुड फ्राइडे और अंततः ईस्टर तक चलता है। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, उपवास और प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने और आत्ममंथन का अवसर प्रदान करती हैं।दोनों ही क्षेत्रों में आयोजित पाम संडे के कार्यक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में एकता, प्रेम और सहयोग की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी है। चित्तरंजन और मिहिजाम में निकली इन शोभायात्राओं ने न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवित रखा, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और आस्था से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया।इस प्रकार पाम संडे का यह पर्व पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, और अब श्रद्धालु आगामी पवित्र दिनों की तैयारी में जुट गए हैं।
चित्तरंजन–मिहिजाम में आस्था की अनुगूंज: पाम संडे पर निकलीं भव्य शोभायात्राएं, गूंजा शांति और प्रेम का संदेश
