हौसले ने रची इतिहास की इबारत, मजदूर की बेटी बनी सीमा की सिपाही, केलाही मोमिन पाड़ा की शबनम परवीन का बीएसएफ में चयन, क्षेत्र में खुशी की लहर

जामताड़ा। जामताड़ा प्रखंड के केलाही मोमिन पाड़ा की रहने वाली शबनम परवीन ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादे और सच्ची लगन के आगे परिस्थितियां भी झुक जाती हैं। मजदूर मो. अजीम अंसारी की पुत्री शबनम का हाल ही में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में चयन हुआ है। वह आगामी 9 फरवरी को पंजाब के होशियारपुर स्थित खड़का कैंप में योगदान देकर देश की सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगी। उनकी इस सफलता से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है।शबनम के पिता मो. अजीम अंसारी ने बताया कि वे मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने कभी भी अपनी बेटी की पढ़ाई और सपनों को रुकने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि शबनम में बचपन से ही देश सेवा का जज़्बा था। यही जुनून उसे कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के रास्ते पर आगे बढ़ाता रहा। कई चुनौतियों और अभावों के बीच भी शबनम ने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को हासिल कर दिखाया।शबनम की इस उपलब्धि से प्रेरित होकर उनकी छोटी बहन भी देश सेवा का सपना संजोए हुए है और उसकी तैयारी में जुटी हुई है। शबनम की प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा उत्क्रमित उच्च विद्यालय, केलाही से हुई है। विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि शबनम पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन और नेतृत्व गुणों में भी हमेशा आगे रही हैं।इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शनिवार को विद्यालय परिसर में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षकों ने शबनम परवीन को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। शिक्षकों ने कहा कि शबनम की सफलता उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। आज शबनम परवीन न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जामताड़ा जिले के लिए गौरव और प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं।

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