तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी जामताड़ा। झारखंड के जामताड़ा जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने वाले दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम अजय कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दोनों अपराधियों को विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय के इस फैसले को साइबर अपराध के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।यह मामला वर्ष 2019 का है, जब कर्माटांड़ थाना क्षेत्र में पुलिस को साइबर ठगी से जुड़ी गतिविधियों की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। पुलिस के अनुसार 8 जनवरी 2019 को तत्कालीन थाना प्रभारी मंगल प्रसाद कुजूर को गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि कुछ लोग फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को फोन कर रहे हैं और उनसे बैंक संबंधी जानकारी लेकर ठगी कर रहे हैं। सूचना की पुष्टि करने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के अलगचुआ गांव में छापेमारी की।छापेमारी के दौरान पुलिस ने सरफराज अंसारी और मन्नान अंसारी नामक दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। दोनों के पास से ऐसे मोबाइल फोन और अन्य सामग्री बरामद की गई, जिनका इस्तेमाल लोगों को झांसा देकर उनके बैंक खातों से पैसे निकालने में किया जाता था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ साइबर थाना कांड संख्या 46/2019 के तहत प्राथमिकी दर्ज की और विस्तृत जांच शुरू की।जांच में यह खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी खुद को बैंक का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। वे लोगों को बताते थे कि उनके बैंक खाते या एटीएम कार्ड में किसी प्रकार की समस्या है और उसे ठीक करने के लिए कुछ जरूरी जानकारी देनी होगी। बातचीत के दौरान वे पीड़ितों से ओटीपी और अन्य बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे। जैसे ही उन्हें ओटीपी मिल जाता, वे तुरंत पीड़ितों के बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कर लेते थे। इस तरह उन्होंने कई लोगों को अपना शिकार बनाया और उनकी मेहनत की कमाई पर हाथ साफ किया।मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद लंबे समय तक अदालत में सुनवाई चली, जिसमें अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों ने अपनी अपनी दलीलें पेश कीं। अदालत ने गवाहों के बयान, प्रस्तुत साक्ष्यों और मामले से जुड़े दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया।सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद न्यायालय ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। अदालत ने दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 419 (पहचान बदलकर धोखाधड़ी करना), धारा 420 (धोखाधड़ी) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत दोषी ठहराया।सजा के रूप में अदालत ने धारा 420 के तहत दोनों को पांच वर्ष के कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया। यदि जुर्माना नहीं दिया जाता है तो उन्हें अतिरिक्त छह माह की जेल की सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा धारा 419 के तहत तीन वर्ष का कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में तीन माह अतिरिक्त कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।वहीं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत भी दोनों आरोपियों को तीन वर्ष के कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यदि यह जुर्माना नहीं दिया जाता है तो तीन माह अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी।हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ साथ चलेंगी। इसका अर्थ यह है कि दोनों दोषियों को अधिकतम पांच वर्ष की सजा ही काटनी होगी। साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया कि विचारण की अवधि के दौरान आरोपियों ने जेल में जो समय बिताया है, उसे उनकी मुख्य सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा।न्यायालय के इस फैसले को जामताड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय साइबर अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी माना जा रहा है। जामताड़ा लंबे समय से देश में साइबर ठगी के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है और पुलिस लगातार ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करती रही है।कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सख्त सजा से साइबर अपराध पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि साइबर ठग लगातार नए नए तरीकों से लोगों को निशाना बनाने की कोशिश करते रहते हैं।फिलहाल दोनों दोषी जेल में बंद हैं और अदालत के आदेश के अनुसार अपनी सजा काट रहे हैं। यह फैसला न केवल पीड़ितों के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि साइबर अपराध के खिलाफ प्रशासन और न्यायपालिका की सख्त प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
फर्जी बैंक अधिकारी बनकर ठगी करने वालों पर अदालत की सख्ती: जामताड़ा में दो साइबर अपराधियों को 5 साल की सजा
