झारखंड में बंगला अकादमी की मांग तेज, जामताड़ा में बंगाली समाज ने सरकार से की पहल की अपील

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी जामताड़ा। झारखंड में बांग्ला भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के साथ साथ शिक्षा के क्षेत्र में बंगाली समाज को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की मांग अब तेज होती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को जामताड़ा के कायस्थ पाड़ा स्थित संत एंथोनी स्कूल के सभागार में झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति की जिला जामताड़ा शाखा की ओर से एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों ने राज्य सरकार से झारखंड में बंगला अकादमी के गठन की मांग उठाते हुए कहा कि इससे बांग्ला भाषा और संस्कृति के विकास को नई दिशा मिल सकेगी।प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति के संरक्षक एवं झारखंड बंगाली समिति, जामताड़ा के अध्यक्ष डॉ. डी. डी. भंडारी ने कहा कि झारखंड एक बहुभाषी राज्य है और यहां विभिन्न समुदायों की भाषाएं और संस्कृतियां सदियों से फलती फूलती रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में बंगला भाषी लोग रहते हैं और सामाजिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके बावजूद राज्य में अब तक बांग्ला भाषा के समग्र विकास के लिए कोई समर्पित संस्थान स्थापित नहीं किया गया है, जो चिंता का विषय है।डॉ. भंडारी ने कहा कि पड़ोसी राज्य बिहार में बांग्ला भाषा के प्रचार प्रसार और साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बंगला अकादमी का गठन किया गया है। इसी प्रकार झारखंड में भी बंगला अकादमी की स्थापना की जानी चाहिए, ताकि यहां के बंगला भाषी समाज को भी अपनी भाषा और संस्कृति के विकास के लिए एक सशक्त मंच मिल सके। उन्होंने कहा कि अकादमी के गठन से साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, शोध कार्य को प्रोत्साहन मिलेगा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी संस्थागत सहयोग प्राप्त होगा।उन्होंने आगे कहा कि यदि झारखंड में बंगला अकादमी की स्थापना होती है तो इसका सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा। इससे बांग्ला भाषा से जुड़े अध्ययन, साहित्य, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से अधिक मजबूती से जुड़ सकेगी।प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. भंडारी ने जामताड़ा रेलवे स्टेशन के नामपट्ट से जुड़े एक मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने बताया कि पहले जामताड़ा रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर बंगला भाषा में भी स्टेशन का नाम अंकित था, लेकिन बाद में रेलवे प्रशासन द्वारा इसे हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय बंगला भाषी लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। इसलिए रेलवे प्रशासन से मांग की गई कि स्टेशन के बोर्ड पर फिर से बंगला भाषा में जामताड़ा का नाम अंकित किया जाए, ताकि क्षेत्र की भाषाई पहचान और सांस्कृतिक सम्मान को बरकरार रखा जा सके।इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में निरसा के विधायक अरूप चटर्जी ने झारखंड विधानसभा के सत्र के दौरान बंगला अकादमी के गठन की मांग को उठाया है। उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक पहल है और इससे उम्मीद जगी है कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगी।प्रेस वार्ता में समिति के मुख्य सलाहकार डॉ. पार्थो बोस ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता से बनती है। राज्य में कई भाषाएं बोली जाती हैं और सभी भाषाओं का अपना अपना महत्व है। ऐसे में यह आवश्यक है कि सरकार सभी भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए समान रूप से प्रयास करे। इससे राज्य की बहुसांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी।डॉ. बोस ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि किसी भी समुदाय की संस्कृति, इतिहास और परंपराओं की वाहक होती है। इसलिए बांग्ला भाषा के संरक्षण और विकास के लिए संस्थागत प्रयास बेहद जरूरी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस दिशा में जल्द ही सकारात्मक कदम उठाएगी।प्रेस वार्ता में उपस्थित समिति के अन्य पदाधिकारियों ने भी कहा कि झारखंड में बंगला भाषी समुदाय लंबे समय से अपनी भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रयास करता रहा है। अब आवश्यकता है कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुने और जल्द ही बंगला अकादमी के गठन की दिशा में पहल करे।इस अवसर पर झारखंड बंगाली समिति के उपाध्यक्ष डॉ. कंचन गोपाल मंडल, महासचिव चंचल कुमार राय, सलाहकार डॉ. चंचल भंडारी, सह कोषाध्यक्ष दीप्ति विराजपाल, कार्यकारिणी सदस्य धनंजय दास तथा मीडिया प्रभारी काजल राज चौधरी सहित कई सदस्य मौजूद रहे।समिति के पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि यदि सरकार इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे झारखंड में बांग्ला भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण को नई दिशा मिलेगी और राज्य की भाषाई विविधता को भी मजबूती मिलेगी।

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