जामताड़ा। जामताड़ा नगर पंचायत क्षेत्र के मोहुलडंगाल की दिव्यांग बालिका विशाखा बाउरी सरकारी तंत्र की लापरवाही का ऐसा दंश झेल रही है, जिसने उसके अधिकारों और भविष्य दोनों को रोक दिया है। वर्ष 2013 में दिव्यांगता प्रमाण पत्र होने के बावजूद विशाखा आज तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं ले पाई है, क्योंकि आधार कार्ड अब तक नहीं बन सका और आधार नहीं बनने की वजह है जन्म प्रमाण पत्र का न बन पाना और भी मुश्किल है।विशाखा का मामला सरकारी दफ्तरों की खामियों का ऐसा उदाहरण है, जहाँ जन्म प्रमाण पत्र के बिना आधार नहीं बनेगा और आधार के बिना जन्म प्रमाण पत्र नहीं दिया जाएगा। इस अंतहीन चक्र में विशाखा और उसका गरीब परिवार वर्षों से थक चुका है। पिता की मौत के बाद माँ कल्पना देवी और एकमात्र भाई मजदूरी कर किसी तरह घर चलाते हैं।नगर पंचायत कार्यालय से लेकर अनुमंडल कार्यालय तक परिवार ने सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए यहां तक कि आंगनबाड़ी की लिखित जानकारी से लेकर आवेदन तक। बावजूद इसके हर बार नई कमी बताकर फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई।शिक्षक अरुण कुमार वर्मा ने जब विशाखा की स्थिति जानी तो उन्होंने पूरी जिम्मेदारी से उसके दस्तावेजों को दुरुस्त कराने का संकल्प लिया। लगभग दो वर्षों में उन्होंने नगर पंचायत, एसडीओ कार्यालय और अन्य विभागों के दर्जनों चक्कर लगाए। यहां तक कि एसडीओ द्वारा आवेदन पर हस्ताक्षर भी कर दिए गए, लेकिन उसके बावजूद जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ और मामला फिर फाइलों के ढेर में गुम हो गया।विशाखा की मां का दर्द साफ झलकता है कि न दिव्यांग पेंशन, न कोई सरकारी सहायता। योजनाएँ कागज़ पर हैं, लेकिन उनका लाभ ज़मीन पर नहीं पहुँच पा रहा।अब परिवार की अंतिम उम्मीद जामताड़ा उपायुक्त से है। उन्हें विश्वास है कि यदि प्रशासन तत्परता दिखाए, तो वर्षों से अटकी विशाखा की फाइल आगे बढ़ेगी और उसे उसका अधिकार मिल सकेगा।
दफ्तरों की धूल में अटका दिव्यांग विशाखा का हक, जन्म प्रमाण पत्र के बिना सरकारी योजनाएँ बनी दूर की चाँदनी
