सीएलडब्ल्यू में क्वार्टर आवंटन पर भड़का असंतोष, कर्मचारियों ने जीएम ऑफिस घेरा, पारदर्शिता की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी चित्तरंजन। चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना में कर्मचारियों के क्वार्टर आवंटन को लेकर लंबे समय से चल रहा असंतोष बुधवार को खुलकर सामने आ गया। जब कर्मचारियों ने इसे आंदोलन का रूप दे दिया। चित्तरंजन रेलवेमेंस कांग्रेस के बैनर तले जो कि एनएफआईआर और इंटक से संबद्ध है। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने जीएम कार्यालय के समक्ष एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया और मौजूदा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग उठाई।सुबह से ही कर्मचारियों का जमावड़ा जीएम कार्यालय के बाहर लगना शुरू हो गया था। प्रदर्शन में शामिल कर्मियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर आवंटन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पक्षपात के खिलाफ आवाज बुलंद की। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कार्यालय का मुख्य द्वार बंद कर दिया और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। हालांकि इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी और किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं होने दी।करीब दो घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन में कर्मचारियों ने कई अहम मुद्दों को उठाया। उनका कहना था कि क्वार्टर आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी है जिसके कारण योग्य कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने स्पॉट अलॉटमेंट प्रणाली को फिर से लागू करने की मांग की। ताकि मौके पर ही स्पष्ट और निष्पक्ष तरीके से आवंटन हो सके। इसके साथ ही टाइप सी और टाइप डी क्वार्टरों में कथित गड़बड़ियों और मनमानी पर भी रोक लगाने की जोरदार मांग की गई।प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वर्तमान व्यवस्था में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां नियमों की अनदेखी कर कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया गया है। इससे कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है और कार्यस्थल का माहौल भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं।करीब दोपहर 2 बजे स्थिति में तब बदलाव आया जब महाप्रबंधक ने आंदोलनकारी प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए आमंत्रित किया और उनका ज्ञापन स्वीकार किया। इसके बाद प्रबंधन और यूनियन नेताओं के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई जिसमें कर्मचारियों की सभी प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई।बैठक के दौरान प्रबंधन की ओर से सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया गया कि क्वार्टर आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने यह भी बताया कि एक आधुनिक ऑनलाइन प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा जिससे आवंटन प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक निष्पक्ष बनाया जा सके। प्रबंधन ने एक महीने के भीतर इस दिशा में ठोस प्रगति करने का भरोसा भी दिया।यूनियन की ओर से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीआरएमसी के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि प्रबंधन अपने वादों को समयसीमा के भीतर पूरा नहीं करता है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।इंद्रजीत सिंह ने कहा हमारा उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि व्यवस्था में सुधार है। हम चाहते हैं कि हर कर्मचारी को उसका अधिकार मिले और आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष हो। यदि हमारी मांगों पर अमल नहीं हुआ तो हम बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।प्रदर्शन में सीआरएमसी के कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें मीडिया प्रभारी अमरेश बर्धन, संजीव कुमार शाही, नेपाल चक्रवर्ती, अमित सिन्हा, अविनब बोस, सतीश पांडे, सूरज कुमार और संतोष कुमार समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल थे। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया जाता है तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। अब देखने वाली बात होगी कि प्रबंधन अपने आश्वासनों को कितनी गंभीरता से लागू करता है और क्या वाकई एक पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था स्थापित हो पाती है या नहीं।फिलहाल आंदोलन स्थगित जरूर हुआ है लेकिन कर्मचारियों की नजरें प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि तय समयसीमा के भीतर सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

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