बेंगलुरु ले जाए जा रहे पांच नाबालिग बच्चों को आरपीएफ ने ट्रेन से उतारकर बचाया, जामताड़ा में सतर्कता से टली बड़ी घटना

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी जामताड़ा। मानव तस्करी और बाल श्रम जैसी गंभीर समस्याओं पर लगाम लगाने की दिशा में जामताड़ा रेलवे सुरक्षा बल ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए पांच नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बचा लिया। ये सभी बच्चे बेंगलुरु जाने वाली साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन में संदिग्ध परिस्थिति में यात्रा कर रहे थे। समय रहते मिली सूचना और त्वरित कार्रवाई के कारण बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया।मिली जानकारी के अनुसार यह पूरी कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई। दिल्ली स्थित जीआरसी हेल्पलाइन से मधुपुर की एक आश्रय संस्था को सूचना मिली थी कि बेंगलुरु जाने वाली ट्रेन में कई नाबालिग बच्चों को ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही संस्था से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता दीपा कुमारी ने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मधुपुर आरपीएफ से संपर्क किया।आरपीएफ अधिकारियों ने सूचना मिलते ही अपने कंट्रोल रूम के माध्यम से संबंधित ट्रेन की निगरानी शुरू कर दी। बताया जाता है कि जिस ट्रेन में बच्चों के होने की सूचना मिली थी वह 22306 नंबर की साप्ताहिक बेंगलुरु एक्सप्रेस थी। जीआरसी हेल्पलाइन से प्रारंभिक जानकारी में बताया गया था कि ट्रेन में लगभग 25 बच्चे मौजूद हो सकते हैं। इसके बाद आरपीएफ टीम ने ट्रेन में सघन जांच अभियान चलाया।जांच के दौरान आरपीएफ की टीम को ट्रेन से पांच नाबालिग बच्चे बरामद हुए। टीम ने तुरंत सभी बच्चों को सुरक्षित अपने संरक्षण में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि ये सभी बच्चे उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के अलग अलग प्रखंडों के रहने वाले हैं।बताया गया कि इन बच्चों ने देर रात जसीडीह रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार होकर बेंगलुरु के लिए यात्रा शुरू की थी। आशंका जताई जा रही है कि बच्चों को काम दिलाने के नाम पर दक्षिण भारत ले जाया जा रहा था। आश्रय संस्था से जुड़ी दीपा कुमारी ने बताया कि प्राथमिक जानकारी के अनुसार बेंगलुरु में स्थित चुलाई नाम की किसी कंपनी में इन बच्चों से दिहाड़ी मजदूरी कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में अक्सर बच्चों को बेहतर नौकरी या अच्छी कमाई का झांसा देकर दूर दराज के शहरों में ले जाया जाता है, जहां उनसे बाल श्रम कराया जाता है। इसलिए इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की गई।घटना की सूचना मिलते ही जिला बाल कल्याण समिति को भी अवगत कराया गया। इसके बाद समिति के सदस्यों ने सभी बच्चों को अपने संरक्षण में ले लिया। अब समिति की ओर से बच्चों की काउंसलिंग कराई जाएगी और उनके परिवारों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समिति आगे यह भी तय करेगी कि बच्चों को सुरक्षित रूप से उनके घर तक कैसे पहुंचाया जाए।आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में लगातार निगरानी अभियान चलाया जा रहा है ताकि बाल तस्करी और अवैध श्रम जैसे मामलों पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि समय रहते मिली सूचना और समन्वित कार्रवाई के कारण बच्चों को सुरक्षित बचाया जा सका।इस पूरे अभियान में आरपीएफ इंस्पेक्टर के नेतृत्व में टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्रवाई के दौरान आरपीएफ के श्रमिक दास गुप्ता और शक्ति कुमार भी मौजूद रहे और उन्होंने जांच अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।इसके अलावा इस अभियान में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और बाल संरक्षण से जुड़े लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। मौके पर आदर्श कुमार यादव, मुन्ना प्रसाद, चाइल्ड हेल्पलाइन परियोजना समन्वयक मनीषा देवी तथा अभिनय कुमार भी मौजूद थे और उन्होंने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में सहयोग किया।स्थानीय लोगों ने आरपीएफ और सामाजिक संगठनों की इस सतर्कता की सराहना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह सतर्कता बरती जाए और समय पर सूचना मिलती रहे तो बाल तस्करी और बाल श्रम जैसी समस्याओं पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।फिलहाल सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और संबंधित एजेंसियां आगे की कार्रवाई में जुट गई हैं।

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