पीआईबी प्रेस रिलीज़ न्यू दिल्ली। भारत-जापान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत सातवीं संयुक्त समिति की बैठक 2 मार्च 2026 को टोक्यो में आयोजित हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल और जापान के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ उप मंत्री ने की। दोनों पक्षों ने समझौते के क्रियान्वयन की प्रगति का आकलन करते हुए आर्थिक सहयोग को और प्रभावी बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की।बैठक के दौरान राजेश अग्रवाल ने जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय (एमईटीआई) के उप मंत्री से अलग से मुलाकात की। इस संवाद में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश प्रवाह, कारोबारी वातावरण में सुधार तथा विश्व व्यापार संगठन के आगामी 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन जैसे अहम मुद्दे केंद्र में रहे।राजेश अग्रवाल ने अगस्त 2025 के वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के नेताओं द्वारा व्यक्त साझा दृष्टि का उल्लेख करते हुए व्यापार और निवेश को व्यापक एवं विविध बनाने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने कहा कि जापान की उन्नत तकनीक, पूंजी और आधुनिक विनिर्माण क्षमता तथा भारत की कुशल मानव संसाधन शक्ति, विशाल उपभोक्ता बाजार और तीव्र आर्थिक वृद्धि में दोनों अर्थव्यवस्थाओं को स्वाभाविक साझेदार बनाती हैं।उन्होंने कपड़ा, औषधि, कृषि और सेवा क्षेत्रों में जापान को भारतीय निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया और संतुलित व्यापारिक संबंधों को दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया।इसके अतिरिक्त, भारतीय उद्योग जगत और जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ गोलमेज चर्चा भी आयोजित की गई। भारतीय उद्योग परिसंघ और केइदानरेन के सहयोग से भारतीय दूतावास द्वारा व्यापार एवं निवेश रोडशो का आयोजन किया गया। इसमें भारत के निवेश-अनुकूल माहौल, सरल नियामकीय प्रक्रियाओं और सीईपीए द्वारा उपलब्ध स्थिर व पारदर्शी ढांचे को रेखांकित किया गया, जो वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत-जापान साझेदारी को नई मजबूती प्रदान करेगा।
भारत सरकार–जापान सरकार सीईपीए समीक्षा बैठक: व्यापार विस्तार पर नई रणनीति
