तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी जामताड़ा। पवित्र रमजान के मुकद्दस महीने के अंतिम दिनों में जामताड़ा के नामुपाड़ा क्षेत्र में एक भव्य दावत ए इफ्तार का आयोजन किया गया, जिसने धार्मिक आस्था के साथ साथ सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पेश की। समाजसेवी हाफिज एहतेशामुल मिर्जा के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में जिले समेत आसपास के कई इलाकों से बड़ी संख्या में रोजेदार, उलेमा और प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए। यह आयोजन न सिर्फ इबादत का अवसर बना, बल्कि लोगों को आपसी प्रेम और सहयोग का संदेश भी दे गया।इफ्तार के तय समय पर सभी रोजेदार एक साथ बैठे और पारंपरिक तरीके से रोजा खोला। खजूर, फल और विभिन्न लजीज व्यंजनों के साथ इफ्तार किया गया। इस दौरान माहौल पूरी तरह आध्यात्मिकता से सराबोर रहा। इफ्तार के बाद सभी ने एकजुट होकर देश में शांति, भाईचारे और तरक्की के लिए दुआएं मांगीं। उपस्थित लोगों के चेहरों पर सुकून और अपनत्व साफ झलक रहा था, जो इस आयोजन की खासियत बन गया।कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि इसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली। रमजान और आने वाले ईद पर्व को ध्यान में रखते हुए आयोजक की ओर से जरूरतमंद महिलाओं के बीच सेवई, सूट और साड़ी का वितरण किया गया। इस पहल को लोगों ने खूब सराहा और इसे समाज सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। कई महिलाओं ने इस सहायता के लिए आयोजक के प्रति आभार व्यक्त किया।इस मौके पर जमीयत उलेमा ए हिंद के जिला अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद सिद्दीक मजाहिरी ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना केवल इबादत का ही नहीं, बल्कि आत्मसंयम, त्याग और जरूरतमंदों की मदद करने का भी संदेश देता है। उन्होंने इस आयोजन को इन मूल्यों का जीवंत उदाहरण बताया।मुफ्ती मजाहिरी ने यह भी जानकारी दी कि इस दावत ए इफ्तार की परंपरा हर वर्ष बड़े पैमाने पर निभाई जाती है, जिसमें दुमका, पाकुड़, साहिबगंज, जामताड़ा, गिरिडीह और धनबाद जैसे विभिन्न जिलों से उलेमा और समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन अब क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।उन्होंने आयोजक हाफिज एहतेशामुल मिर्जा के सामाजिक कार्यों की भी सराहना करते हुए बताया कि वे पलामू क्षेत्र में संचालित कई मदरसों को आर्थिक सहयोग प्रदान करते हैं। इस सहयोग से गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इफ्तार के दौरान उपस्थित लोगों के बीच आपसी संवाद और मेल मिलाप का भी सुंदर दृश्य देखने को मिला। लोग एक दूसरे से गले मिलकर रमजान की मुबारकबाद दे रहे थे और समाज में शांति बनाए रखने की बात कर रहे थे। कार्यक्रम में शामिल कई गणमान्य व्यक्तियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन लोगों के बीच दूरी को खत्म कर एकता को मजबूत करते हैं।कार्यक्रम के अंत में सभी ने सामूहिक रूप से देश की उन्नति, समाज में भाईचारे और अमन चैन के लिए विशेष दुआ की। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन की खुले दिल से प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को एकजुट रहने की प्रेरणा देते हैं।पूरे आयोजन में अनुशासन, सौहार्द और सेवा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। चाहे इफ्तार की व्यवस्था हो या जरूरतमंदों की सहायता हर पहल में मानवता की झलक नजर आई। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब समाज के लोग मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो न केवल धार्मिक आस्था मजबूत होती है, बल्कि सामाजिक एकता भी सुदृढ़ होती है।कुल मिलाकर, नामुपाड़ा में आयोजित यह दावत ए इफ्तार एक यादगार आयोजन बन गया, जिसने इबादत के साथ साथ इंसानियत, सहयोग और भाईचारे का मजबूत संदेश दिया। यह कार्यक्रम आने वाले समय में भी समाज को एकजुट रखने और जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा देता रहेगा।
जामताड़ा में इफ्तार की रौनक: इबादत के संग इंसानियत और एकता का संदेश
