जैक की फीस वृद्धि पर जामताड़ा में तीखा विरोध, शिक्षा के अधिकार पर ‘कठोर प्रहार’ बताया

जामताड़ा। झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा हाल ही में की गई फीस बढ़ोतरी के फैसले के खिलाफ आवाजें तेज़ होती जा रही हैं। झारखंड तहरीक-ए-उर्दू तंजीम, जामताड़ा के अध्यक्ष मो. अलीमुद्दीन अंसारी ने इस निर्णय की तीखी निंदा करते हुए इसे ‘तानाशाहीपूर्ण, अव्यावहारिक और सामाजिक न्याय के खिलाफ’ बताया है। अलीमुद्दीन अंसारी ने कहा कि राज्य के लाखों ग़रीब, दलित, पिछड़े और वंचित परिवार पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे में फीस वृद्धि का यह निर्णय बच्चों की शिक्षा को और अधिक मुश्किल बना देगा। उन्होंने कहा कि जिन घरों में दो वक्त का भोजन जुटाना कठिन होता है, उनके लिए बढ़ी हुई फीस भरना असंभव जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जैक ने राज्य की जमीनी हकीकत और सामाजिक परिस्थितियों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया है। “सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर छात्र आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आते हैं। फीस बढ़ाकर इन छात्रों के सपनों पर सीधा प्रहार किया गया है। अंसारी ने यह भी चेतावनी दी कि फीस वृद्धि से छात्र–छात्राओं के पढ़ाई छोड़ने की दर बढ़ेगी और कई बच्चों को मजबूरी में मजदूरी की ओर धकेला जा सकता है। “यह सिर्फ आर्थिक बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की हत्या है। उन्होंने झारखंड सरकार, शिक्षा मंत्री और संबंधित अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप कर जैक के इस फैसले को रद्द कराने की मांग की। सरकार को समझना चाहिए कि एक मनमाना फैसला लाखों छात्रों का भविष्य अंधेरे में धकेल सकता है। शिक्षा बोझ नहीं, अधिकार होनी चाहिए। अंत में उन्होंने साफ किया कि यह विरोध केवल एक संगठन का नहीं, बल्कि उन अनगिनत छात्रों की आवाज़ है जो आर्थिक संकट के बावजूद अपना भविष्य संवारने का सपना देखते हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला वापस होने तक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *