जामताड़ा। झारखंड राज्य के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर जामताड़ा महाविद्यालय में आयोजित बहु-दिवसीय कार्यक्रमों का भव्य समापन 16 नवंबर को उत्साह और गौरव के माहौल में किया गया। इस वर्ष समारोह की विशेषता यह रही कि इसमें वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ भी पूरे सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक वंदे मातरम् गान से हुई, जिसकी गूंज से पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से सरोबर हो गया।
स्थापना दिवस को लेकर महाविद्यालय में सांस्कृतिक, साहित्यिक और शैक्षणिक प्रतियोगिताओं की श्रृंखला आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। समापन अवसर पर विजयी प्रतिभागियों को मंच पर सम्मानित करते हुए प्रमाणपत्र और मोमेंटो प्रदान किए गए तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। अतिथियों ने छात्रों की भागीदारी और उत्साह को सराहा तथा इसे झारखंड की युवा ऊर्जा और रचनात्मक क्षमता का प्रतीक बताया।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने झारखंड की संस्कृति, संघर्ष, जन-आंदोलन और विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य का 25वां स्थापना वर्ष सिर्फ उत्सव का नहीं बल्कि शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का नया संकल्प है। साथ ही वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ को भारत की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रनिष्ठा का गौरवपूर्ण क्षण बताया गया।
कार्यक्रम में प्रो. डॉ. काकोली गोराई, प्रो. नीलम कुजूर, प्रो. वंदना कुसुम एक्का, डॉ. अनिल कुमार टेटे, प्रो. राजमती किस्कू एवं प्रो. उर्मिला सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे समारोह ने एक बार फिर यह साबित किया कि जामताड़ा महाविद्यालय सिर्फ शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि संस्कृति और युवा सृजनशीलता का संगम भी है।
