जामताड़ा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: साइबर ठगी गिरोह का सदस्य गिरफ्तार, योनो ऐप के नाम पर देशभर में करता था ठगी

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी जामताड़ा। जामताड़ा पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जामताड़ा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में एक सक्रिय साइबर अपराधी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। आरोपी लोगों को बैंकिंग ऐप के नाम पर झांसा देकर ठगी करने का काम करता था और उसका नेटवर्क देश के विभिन्न हिस्सों तक फैला हुआ था।मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक को सूचना प्राप्त हुई थी कि करमाटांड़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत मोहनपुर-गुनीडीह जाने वाली कच्ची सड़क के पास, ग्राम रतनोडीह स्थित परती टांड़ इलाके में कुछ साइबर अपराधी सक्रिय हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम का नेतृत्व साइबर अपराध थाना, जामताड़ा के पुलिस निरीक्षक मनीष कुमार गुप्ता कर रहे थे। उनके साथ सहायक पुलिस अवर निरीक्षक कुन्दन कुमार वर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया।पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से उक्त स्थान पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति को संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाया गया, जिसे मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अबुल अंसारी (28 वर्ष) के रूप में हुई है, जो करमाटांड़ थाना क्षेत्र के गुनीडीह गांव का निवासी है। पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड बरामद किया है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था।इस संबंध में जामताड़ा साइबर अपराध थाना में कांड संख्या 19/26, दिनांक 02 अप्रैल 2026 के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 111(2)(बी), 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2), 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 (बी), (सी), (डी) एवं टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 की धारा 42(3)(ई) के तहत कार्रवाई की जा रही है।जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि आरोपी एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा था। वह लोगों को फोन कर खुद को बैंक अधिकारी या प्रतिनिधि बताता था और योनो ऐप चालू करने या अपडेट करने के नाम पर उन्हें भ्रमित करता था। इसके बाद वह व्हाट्सएप या अन्य स्क्रीन शेयरिंग एप के माध्यम से पीड़ितों से उनका मोबाइल स्क्रीन शेयर करवाता था।जैसे ही पीड़ित स्क्रीन शेयर करता, आरोपी उनके बैंकिंग विवरण जैसे यूजर आईडी और पासवर्ड तैयार कर लेता था। इसके बाद वह ओटीपी प्राप्त कर नेट बैंकिंग के जरिए उनके खातों से पैसे निकाल लेता था। इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया जाता था, जिससे पीड़ित को ठगी का अहसास तब तक नहीं होता था जब तक उनके खाते से पैसे निकल नहीं जाते।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी का कार्यक्षेत्र केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि वह देश के विभिन्न राज्यों के लोगों को निशाना बनाता था। इससे यह स्पष्ट होता है कि जामताड़ा एक बार फिर साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के रूप में सामने आ रहा है, जहां से संचालित गिरोह पूरे देश में लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।पुलिस अधीक्षक ने इस सफलता को टीम वर्क का परिणाम बताते हुए कहा कि साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ऐप के झांसे में न आएं और अपनी निजी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।उन्होंने विशेष रूप से लोगों को सतर्क करते हुए कहा कि बैंक या कोई भी वित्तीय संस्था कभी भी फोन पर ओटीपी, पासवर्ड या स्क्रीन शेयर करने के लिए नहीं कहती। यदि कोई ऐसा करता है, तो वह निश्चित रूप से ठग है। ऐसी स्थिति में तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना नजदीकी पुलिस थाना या साइबर हेल्पलाइन नंबर पर दें।इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब आरोपी से जुड़े अन्य नेटवर्क और सहयोगियों की तलाश में जुट गई है। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह में कई अन्य सदस्य भी शामिल हो सकते हैं, जो अलग-अलग स्थानों से इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं।जामताड़ा पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से एक बार फिर यह संदेश गया है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और कानून के शिकंजे से बच पाना अब आसान नहीं है। पुलिस की सक्रियता और सजगता से आम जनता में भी भरोसा बढ़ा है कि उनके साथ होने वाली ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं, जिससे साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश संभव हो सकेगा।

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