कुंडहित (जामताड़ा)— एक समय शासन–प्रशासन की गतिविधियों का अहम केंद्र रहा कुंडहित का ऐतिहासिक डाक बंगला आज पूरी तरह उपेक्षा का शिकार होकर जर्जर हालत में पहुंच गया है। अंग्रेजी शासनकाल में मजबूत गुणवत्ता के साथ निर्मित यह भवन वर्षों तक अधिकारियों के ठहराव और सरकारी बैठकों का प्रमुख स्थान हुआ करता था, परंतु अब इसकी दीवारें उपेक्षा की कहानी बयां कर रही हैं।
वर्तमान में डाक बंगला का मुख्य कमरा आरईओ विभाग के कार्यालय के रूप में उपयोग हो रहा है, जबकि इसका बरामदा स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मिलन स्थल बन चुका है। इसी बीच कुछ महीने पहले भवन के एक हिस्से पर बड़ा पेड़ गिरने से संरचना आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गई, जो आज तक नहीं हटाया गया है और किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।
छत की लकड़ियां कमजोर होकर टूटने की कगार पर हैं, किवाड़–खिड़कियां जर्जर हो चुकी हैं और दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा है। जिला परिषद की भूमि पर स्थित यह भवन वर्षों से मरम्मत की राह देख रहा है।
जिला परिषद सदस्य रीना मंडल ने बताया कि डाक बंगला एवं परिसर की मरम्मती के लिए कई बार जिला कार्यालय में आवेदन दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगली बैठक में भी इस मुद्दे को मजबूती से रखा जाएगा, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को नई जिंदगी मिल सके।
