जामताड़ा। जहाँ आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में कई बुजुर्ग माताओं को वृद्धाश्रमों का सहारा लेने पर मजबूर होना पड़ता है, वहीं जामताड़ा के राजबाड़ी छोब्बी तल्ला के दत्ता परिवार ने मानवता और संस्कारों की एक नई मिसाल पेश की। कंचन कुमार दत्ता और आस्तीक दत्ता ने अपनी माता लक्ष्मी रानी दत्ता का 75वां जन्मदिन न केवल परिवार, बल्कि पूरे समाज के साथ मिलकर मनाया, जिसने लोगों के दिलों को गहराई से छू लिया।
रविवार को आयोजित इस विशेष उत्सव की शुरुआत माता के सम्मान में पूजा-अर्चना से हुई। घर में रंगीन सजावट, दीपों की रोशनी और भक्ति-भाव से भरा वातावरण पूरे समारोह को आध्यात्मिक और भावुक बना रहा। परिवार के सदस्यों ने माता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
दत्ता परिवार का संदेश स्पष्ट था कि “माँ सिर्फ परिवार की नहीं, पूरे जीवन की दिशा होती हैं। उनका सम्मान करना हमारा धर्म है।” कंचन और आस्तीक दत्ता ने कहा कि ऐसे दौर में, जब कई लोग अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं, माँ का जन्मदिन समाज के साथ मिलकर मनाना उनके लिए गर्व का विषय है। उनके अनुसार, माँ ने उन्हें संस्कृति, मूल्य और जीवन जीने की सीख दी। इसलिए उनकी सेवा और सम्मान से बढ़कर कोई कर्तव्य नहीं हो सकता।
कार्यक्रम में केक काटने की परंपरा को छोड़, दीप प्रज्वलन कर संस्कारित तरीके से जन्मदिन मनाया गया। बच्चों ने उपहार व हस्तनिर्मित कार्ड दिए, तो बुजुर्गों ने आशीर्वाद देकर माहौल को भावनाओं से भर दिया। अंत में रिश्तेदारों, पड़ोसियों और समाज के लोगों के साथ सामूहिक भोज का आयोजन किया गया, जो पारिवारिक एकता और सामाजिक मूल्यों का खूबसूरत प्रतीक बना।
इस उत्सव ने एक गहरा संदेश दिया कि “माँ का सच्चा स्थान वृद्धाश्रम नहीं, उनके बच्चों का घर और दिल है।”
लक्ष्मी रानी दत्ता का 75वां जन्मदिन इसी परिवारिक परंपरा और मानवीय मूल्यों का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा।
