नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के संकेत से सियासी हलचल, झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने जताई हैरानी

तहलका न्यूज 24 संवाददाता काजल राय चौधरी रांची। बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर एक भावनात्मक संदेश साझा करते हुए राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर की। उनके इस संदेश के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। खासकर झारखंड की राजनीति में भी इस पर प्रतिक्रिया देखने को मिली। झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस फैसले को आश्चर्यजनक और चिंताजनक बताया।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संदेश में बिहार की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से लोगों ने उन पर भरोसा जताया है और उसी भरोसे के बल पर उन्हें राज्य की सेवा करने का अवसर मिला। उन्होंने लिखा कि जनता के समर्थन और विश्वास के कारण ही बिहार आज विकास और सम्मान के नए मुकाम पर पहुंचा है।अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में एक इच्छा रही है कि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के चारों सदनों में बिहार विधान मंडल के दोनों सदन और संसद के दोनों सदन का सदस्य बनने का अनुभव प्राप्त करें। इसी उद्देश्य से इस बार हो रहे चुनाव में वे राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं।उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि राज्यसभा जाने का निर्णय उनके और बिहार की जनता के बीच बने रिश्ते को प्रभावित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जनता के साथ उनका संबंध पहले की तरह कायम रहेगा और वे आगे भी एक विकसित बिहार के निर्माण के लिए योगदान देते रहेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।हालांकि मुख्यमंत्री के इस बयान के सामने आते ही कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। इसी क्रम में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने अपने X हैंडल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नीतीश कुमार का यह निर्णय उन्हें अत्यंत चौंकाने वाला लग रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद को छोड़कर राज्यसभा जाने का फैसला राजनीतिक रूप से आत्मघाती कदम प्रतीत होता है।इरफान अंसारी ने अपने संदेश में सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थिति बन गई कि इतने अनुभवी नेता को ऐसा निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या मुख्यमंत्री पर किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव है या उन्हें किसी तरह मजबूर किया जा रहा है।उन्होंने आगे कहा कि यदि वास्तव में ऐसा कोई दबाव है तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना था कि देश की राजनीति में नीतीश कुमार को एक अनुभवी और दूरदर्शी नेता के रूप में देखा जाता है, इसलिए उनसे हमेशा स्थिरता और साहसिक नेतृत्व की अपेक्षा की जाती रही है।इरफान अंसारी ने यह भी सुझाव दिया कि यदि नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता थी तो उसके लिए कई अन्य विकल्प भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपने उत्तराधिकारी को आगे बढ़ा सकते थे, उन्हें उपमुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दे सकते थे और स्वयं मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते थे। ऐसे में अचानक राज्यसभा जाने की घोषणा कई सवाल खड़े करती है।उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला केवल बिहार की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर झारखंड सहित पूरे देश के राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ सकता है। उनके अनुसार इस निर्णय ने कई लोगों को हैरान कर दिया है और राजनीतिक विश्लेषक भी इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश कर रहे हैं।झारखंड के मंत्री ने अपने संदेश में नीतीश कुमार से आग्रह करते हुए कहा कि वे अपने इस निर्णय पर एक बार फिर विचार करें। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के दबाव या राजनीतिक प्रेशर के सामने झुकना उनके व्यक्तित्व के अनुरूप नहीं है। लोकतंत्र में हमेशा संवाद और सहयोग का रास्ता खुला रहता है।इरफान अंसारी ने यह भी कहा कि यदि किसी तरह की राजनीतिक प्रताड़ना या दबाव की स्थिति बन रही है तो उसे सार्वजनिक रूप से सामने लाना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक ताकतें उनके साथ खड़ी हो सकें। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की जनता और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली ताकतें ऐसे समय में उनके साथ खड़ी रहेंगी।इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के इस बयान के कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आगे इस मुद्दे पर क्या नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है।

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