मां चंचला महोत्सव के द्वितीय दिवस पर आस्था का महासंगम, वैदिक अनुष्ठान और कीर्तन से गूंजा मंदिर प्रांगण

जामताड़ा। जगत जननी कुल देवी मां चंचला के पावन धाम में आयोजित 13वें मां चंचला त्रिदिवसीय त्रयोदस वार्षिक महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सौहार्द का अनुपम दृश्य देखने को मिला। मां चंचला मंदिर परिसर में प्रातः से ही वैदिक परंपराओं के अनुसार षोडशोपचार पूजा का आयोजन हुआ, जिसमें 21 ब्राह्मणों द्वारा सामूहिक चंडी पाठ संपन्न कराया गया। मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।इस पावन अनुष्ठान में मुख्य यजमान वीरेंद्र मंडल ने मां चंचला के चरणों में विधिवत पूजा अर्चना कर क्षेत्र की सुख शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। दिनभर श्रद्धालुओं का मंदिर में तांता लगा रहा। पूजा पाठ के उपरांत सायंकाल भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।संध्या काल में आयोजित बंगला पाला कीर्तन ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मां की लीलाओं और शक्ति स्वरूप का संगीतमय वर्णन देर रात तक मंदिर परिसर को जयकारों से गुंजायमान करता रहा।इस अवसर पर वीरेंद्र मंडल ने कहा कि ऐतिहासिक कलश शोभा यात्रा और दूसरे दिन के धार्मिक आयोजनों ने महोत्सव को नई ऊंचाई दी है। उन्होंने इस आयोजन की सफलता का श्रेय सभी वर्गों, सभी धर्मों के नागरिकों को देते हुए सामाजिक एकता और भाईचारे की मिसाल बताया।मां चंचला का यह महोत्सव आस्था के साथ साथ सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।

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