जामताड़ा। ऐतिहासिक गांधी मैदान (फांसी डंगाल) में माँझी परगना सरदार महासभा, जिला जामताड़ा के तत्वावधान में 171वां संताल परगना स्थापना दिवस एवं 22वां संताली भाषा विजय दिवस गरिमा, संघर्ष और आत्मसम्मान के भाव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सुनील कुमार हांसदा ने की, जबकि मंच संचालन जामताड़ा प्रखंड अध्यक्ष नाजिर सोरेन ने किया। समारोह की शुरुआत अमर शहीद सिदो–कान्हू मुर्मू की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई।
मुख्य अतिथि लॉबिर बैसी के माँझी बाबा हराधन मुर्मू ने 22 दिसंबर 1855 को संताल समाज के इतिहास का निर्णायक दिन बताते हुए अधिकार, शिक्षा, कुरीतियों के उन्मूलन और नशामुक्त समाज के लिए संगठित संघर्ष का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सुनील कुमार बास्की ने संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के संघर्ष को स्मरण करते हुए संताल परगना की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा पर जोर दिया।
जिला अध्यक्ष सुनील कुमार हांसदा ने राजस्व प्रधान बहाली में अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए प्रशासन को चेतावनी दी। समारोह में कुल आठ महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिन्हें उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल को भेजने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम को लेबेन हांसदा, सर्जन हांसदा, मुखिया सुखेंद्र टुडू, परेश मरांडी, नंदलाल हांसदा, सीताराम मुर्मू और मुंशी हेम्ब्रम ने संबोधित किया।
इस अवसर पर सज्जन मुर्मू, तारकेश्वर मुर्मू, डॉक्टर सोरेन, सहेबलाल मरांडी, कालीश्वर सोरेन सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्धजन और ग्रामीण उपस्थित रहे। समारोह ने समाज को एकजुट रहकर अपने अधिकारों और भाषा-संस्कृति की रक्षा का संकल्प दोहराने का संदेश दिया।
गांधी मैदान में गूंजा सिदो–कान्हू का जयघोष, संताल परगना दिवस पर एकता और अधिकार का संकल्प
