जामताड़ा महाविद्यालय में वंदे मातरम के 150 वर्ष पर गूँजा राष्ट्रभाव का स्वर

जामताड़ा। जामताड़ा महाविद्यालय में गुरुवार को एनएसएस इकाई–2 द्वारा वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. कौशल ने की। बड़ी संख्या में छात्र–छात्राओं, शिक्षकों और स्वयंसेवकों की उपस्थिति ने पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से भर दिया।

प्रो. कौशल ने संबोधित करते हुए कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक सूत्र रहा। अंग्रेज शासन द्वारा लगाया गया प्रतिबंध इसकी शक्तिशाली प्रभावशीलता को दर्शाता है।
डॉ. विरेंद्र सिंह ने कहा कि वंदे मातरम ने क्रांतिकारियों में साहस और त्याग की भावना जागृत की, और आज भी यह राष्ट्रगौरव का प्रतीक है।

कार्यक्रम प्रभारी डॉ. प्रीति कुमारी ने कहा कि वंदे मातरम केवल गीत नहीं, बल्कि भारतीयता की ऊर्जा और संकल्प है।
अंत में सामूहिक गायन हुआ, जिसमें छात्रों ने उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना रहा।

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