जामताड़ा। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच उलेमा प्रकोष्ठ झारखंड के प्रदेश संयोजक मौलाना अब्दुल रक़ीब अंसारी ने वक़्फ़ संपत्तियों के आधुनिकीकरण को समावेशी विकास की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि देश की 8.72 लाख पंजीकृत वक़्फ़ संपत्तियों में अपार संभावनाएँ छिपी हैं, जिन्हें आधुनिक प्रबंधन और पारदर्शिता के जरिए समाज के हित में बदला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम 2025, यानी “उम्मीद अधिनियम”, वक़्फ़ प्रशासन में ऐतिहासिक सुधार लाने जा रहा है। डिजिटल रजिस्ट्रेशन, केंद्रीकृत रिकॉर्ड, अनिवार्य ऑडिट, “वक़्फ़ बाय यूज़र” नियम खत्म होना, बोर्ड में महिलाओं और गैर-मुस्लिम सदस्यों की भागीदारी—ये सुधार वक़्फ़ को पारदर्शी और जवाबदेह बनाएंगे।
मौलाना अंसारी ने कहा कि यह बदलाव वक़्फ़ को धार्मिक ढांचे से आगे बढ़ाकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के शक्तिशाली संस्थान में बदलेगा। उन्होंने मलेशिया के सफल मॉडल का उल्लेख करते हुए भारत में जीआईएस, ब्लॉकचेन और प्रोफेशनल मैनेजमेंट अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा—“वक़्फ़ चलाना धार्मिक जिम्मेदारी ही नहीं, एक आधुनिक आर्थिक दायित्व भी है।”
